Saraikela: सरायकेला खरसावां जिला के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत लेंगडीह गांव में NH-32 बाईपास निर्माण के बाद जल निकासी का रास्ता नहीं दिए जाने से एक किसान की 130 डिसमिल जमीन पिछले 4 सालों से जलमग्न है. किसान ने उपायुक्त से मुआवजा और पुलिया निर्माण की मांग की है. साथ ही एक सप्ताह में समाधान नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है.
6 से 8 फीट ऊंची सड़क, लेकिन नहीं बनाई गई पुलिया
लेंगडीह निवासी अरूप कुमार महतो का आरोप है कि रांची-टाटा-चांडिल-पुरुलिया NH-32 बाईपास को जमीन से 6 से 8 फीट ऊंचा बना दिया गया है. लेकिन पानी निकासी के लिए पुलिया या कल्वर्ट नहीं बनाई गई. नतीजा यह हुआ कि उनकी मौजा-लेंगडीह, खाता-24, प्लॉट-55 की 130 डिसमिल कृषि भूमि में साल भर पानी भरा रहता है. किसान का कहना है कि जलजमाव के कारण न धान, न चना, न सरसों और न ही रबी की कोई फसल हो पा रही है. इस बार उन्होंने 250 रुपये किलो की दर से 25 किलो हाइब्रिड धान का बीज खरीदा था, वह भी पानी में सड़कर नष्ट हो गया. पिछले 4 वर्षों में लाखों रुपये की क्षति हो चुकी है.
Read Also: गिरिडीह: SIR-2026 अभियान को लेकर गिरिडीह प्रशासन सक्रिय, बेंगाबाद में घर-घर पहुंचे DC रामनिवास यादव
चार साल से नहीं हो पा रही खेती, लाखों का नुकसान
अरूप कुमार महतो, प्रभावित किसान .जब अपनी बात रखने जाते हैं तो NHAI के अधिकारी केस में फंसाने की धमकी देते हैं. हम डर के मारे कुछ नहीं बोल पाते. DC महोदय से अनुरोध है कि पुलिया बनवाई जाए और 4 साल की क्षति का मुआवजा दिया जाए. एक हफ्ते में न्याय नहीं मिला तो हम चांडिल अंचल से DC कार्यालय तक धरना करेंगे. ग्रामीणों का कहना है कि 60 के दशक में भी औद्योगिक विकास के नाम पर जमीन ली गई थी, लेकिन आज तक क्षेत्र में न सड़क, नाला और न सीवेज की व्यवस्था हुई. अब NH निर्माण से खेती पूरी तरह चौपट हो गई है.
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग
पीड़ित किसान ने जिला प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है. अगर समय पर जल निकासी का रास्ता नहीं बना तो क्षेत्र के कई और किसानों की जमीन भी इसी तरह बर्बाद हो जाएगी. अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है.
