Ranchi: राजधानी में फुटपाथ दुकानदारों और वेंडरों के अधिकारों को लेकर आज आयोजित मंथन शिविर में रांची वेंडर महासमिति का गठन किया गया. महासमिति का मुख्य संयोजक ललित नारायण ओझा को बनाया गया, जबकि संजय कुमार जायसवाल, बिंदुल वर्मा और दिनेश चौबे को संयोजक की जिम्मेदारी दी गई.
जनप्रतिनिधियों के साथ बने समन्वय समिति
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य संयोजक ललित नारायण ओझा ने कहा कि राजधानी को व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए सरकार को नगर निगम, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर ठोस योजना तैयार करनी चाहिए. उनका कहना था कि गरीबों की आजीविका की अनदेखी कर किया गया विकास न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.
वेंडरों के सर्वे और स्थायी व्यवस्था की मांग
महासमिति ने सरकार से मांग की कि सभी नगर निगम क्षेत्रों में मेयर, उपमहापौर, पार्षदों और अन्य जनप्रतिनिधियों को शामिल कर एक समन्वय समिति बनाई जाए. इसके साथ ही वेंडरों की संख्या, लाइसेंस और उनके व्यवसायिक क्षेत्रों का व्यापक सर्वे कर स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि शहर में अव्यवस्था न फैले और वेंडरों का रोजगार भी सुरक्षित रहे.
रोजगार छीनना गरीब विरोधी कदम
ललित नारायण ओझा ने कहा कि हजारों फुटपाथ दुकानदारों, फल-सब्जी विक्रेताओं और रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लोगों को हटाकर बेरोजगार करना गरीब विरोधी कदम होगा. उन्होंने कहा कि इन लोगों की आजीविका प्रभावित होने से केवल उनके परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे शहर की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित होंगी.
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बड़े आंदोलन की बनाई गई रणनीति
मंथन शिविर में वेंडरों को संगठित करने, उनके अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को तेज करने और आने वाले दिनों में बड़े जनआंदोलन की रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी. महासमिति ने स्पष्ट किया कि यदि वेंडरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
