Lohardaga: जिले के भंडरा प्रखंड अंतर्गत हाटी गांव में ग्रामीणों ने एकजुट होकर धर्मांतरण की कोशिश पर पूर्ण विराम लगा दिया है. 4 जुलाई 2026 को IRS अधिकारी निशा उरांव की अगुवाई में हाटी गांव में एक विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया. इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता गांव के पहान राजा विद्यासागर उरांव ने किया. ग्राम सभा में गांव की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक मूल्यों की रक्षा पर गंभीरता से चर्चा हुई. बैठक में सभी ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से एक बड़ा फैसला लिया, इसके तहत धर्मांतरण की मंशा या उसकी नियत से गांव में आने वाले पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी. इस निर्णय को सख्ती से लागू करने के लिए ग्रामीणों ने पुख्ता इंतजाम भी किए हैं. गांव के सभी मुख्य द्वारों पर बकायदा चेतावनी भरा बोर्ड लगाया है, इन बोर्डों पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि धर्मांतरण के उद्देश्य से आने वाले बाहरी प्रचारकों का गांव में प्रवेश वर्जित है. ग्रामीणों का कहना है कि वे अपने समाज की परंपराओं और संस्कृति से कोई समझौता नहीं करेंगे.
*ग्रामीणों ने कहा ग्राम सभा में संविधान के अनुच्छेदों का हुआ पालन*
हाटी गांव में ग्राम सभा का निर्णय धर्मांतरण को रोकने और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के लिए लिया गया. विगत 4 वर्षों में गांव के सात आदिवासी परिवार पास्टर-पादरी के प्रलोभन में आकर धर्मांतरित हो चुके थे, जबकि कुछ अन्य परिवार भी धर्मांतरण की कगार पर थे. इस स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने पारंपरिक स्वशासन (अबुआ राज) और पेशा कानून के तहत कदम उठाया. संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों (पेशा कानून 4-घ और पेशा नियमावली धारा 23-1, 2) का उपयोग करते हुए ग्रामसभा ने बैठक की. इसमें अपनी धर्म, परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए गांव में प्रलोभन देने के उद्देश्य से आने वाले बाहरी तत्वों (पादरी/पास्टर) के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई. पेशा नियमावली की धारा 23 (5) ए के तहत ग्रामसभा को ऐसे विवादों के निपटारे का अधिकार है, निर्णय न मानने पर मामला पड़हा (पारंपरिक व्यवस्था) में जाएगा. ग्रामीणों ने कहा कि ग्राम सभा में संविधान के तहत पेशा कानून के सभी अनुच्छेदों का किया गया पालन.

*धर्मांतरण का विवाद पर पुलिस को करनी पड़ी थी हस्तक्षेप*
अप्रैल 2026 में झारखंड के लोहरदगा जिले के भंडरा प्रखंड अंतर्गत हाटी गांव और कुंबा टोली के कुछ परिवारों द्वारा धर्मांतरण करने का मामला सामने आया था. इसकी जानकारी देते हुए पहान विद्यासागर उरांव ने बताया कि हाटी गांव के अजय उरांव (पिता फगुआ उरांव), दुगा उरांव (पिता सोमें उरांव), बसंती उरांव (पति स्वर्गीय राजेंद्र उरांव) और कुंबा टोली का एक अन्य परिवार शामिल है, जिन्होंने वर्ष 2022 में ही धर्म परिवर्तन कर लिया था. ये लोग गांव के अन्य ग्रामीणों को भी बहला-फुसलाकर धर्मांतरण के लिए प्रेरित कर रहे थे, इसकी भनक लगते ही ग्रामीणों ने एकजुट होकर इस पर कड़ी आपत्ति जताई और विरोध शुरू कर दिया. इस बात को लेकर 15 अप्रैल 2026 को गांव में विवाद काफी बढ़ गया, स्थिति को बिगड़ता देख स्थानीय भंडरा थाना पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों के बीच सुलह कराई. इस दौरान अजय उरांव ने चर्च जाने की बात दोहराते हुए ग्रामीणों से अपना कोई संबंध न रखने की बात कही.
*गांव में समस्या होने पर ग्राम सभा के माध्यम से होता है समाधान*
भंडरा प्रखंड के हाटी गांव में पहान राजा विद्यासागर उरांव की अध्यक्षता में ग्राम सभा का आयोजन किया गया जाता है. जिसमें ग्रामीणों के बीच होने वाले छोटे-मोटे आपसी विवादों को सुलझाने और अन्य सामाजिक बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा होती है. साथ ही ग्राम सभा के माध्यम से समाधान भी किया जाता है, ग्राम सभा में क्षेत्र में बढ़ते नशा उन्मूलन को लेकर गहरी चिंता जताई और इसे समाज से पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया जा चुका है. इसके अलावा, गांव में चल रही अन्य गतिविधियों की भी समीक्षा की होती है, धर्मांतरण की रोकथाम को लेकर भव्य ग्राम सभा चार जुलाई को की गई थी.
*ग्राम सभा के बाद पास्टर पादरियों की रोक से लोगो में खुशी*
भंडरा प्रखंड अंतर्गत हाटी गांव में आयोजित ग्राम सभा के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह और खुशी का माहौल है. खुशी जाहिर करते हुए गांव के सुरेंद्र उरांव ने बताया कि धर्मांतरण की रोकथाम को लेकर एक विशेष जागरूकता बोर्ड लगाया गया है. जिसकी लोग जमकर सराहना कर रहे हैं, इस सकारात्मक पहल से हाटी, नवाटोली, इरगांव, उदरंगी, बैमारी सहित आसपास के अन्य आदिवासी बहुल गांवों के लोग भी बेहद खुश हैं. इस बोर्ड के लगने के बाद क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण को बल मिला है, हाटी गांव की इस सफल मुहिम से प्रेरित होकर अब क्षेत्र के अन्य आदिवासी गांवों के ग्रामीणों ने भी अपने-अपने यहां इसी तरह की ग्राम सभाएं आयोजित करने का मन बना लिया है.
ALSO READ: बोकारो: SIR-2026 अभियान में अनीता देवी एवं मंजू देवी बनीं ‘BLO of the Day’
*मामले में क्या कहते है लोग*
धर्मांतरण के कारण आदिवासी संस्कृति सभ्यता पर असर पड़ रहा है. लोग अपनी अस्मिता की लड़ाई लड़ रहे है, जब अपनी संस्कृति सभ्यता की बात हो तो आदिवासी समाज एक जुट है. गांव में ग्राम सभा उद्देश्य धर्मांतरण पर रोक लगाना है.
विद्यासागर उरांव, पहान राजा, हाटी
गांव में विगत कई वर्षों से प्रलोभन, बीमारी ठीक करने के नाम पर लोगों को पास्टर-पादरियों द्वारा बहला फुसलाकर धर्मांतरण का खेल किया जा रहा था. जिसकी भनक लगते ही ग्रामीण एक जुट हुएं, धर्मांतरण के खिलाफ ग्राम सभा के माध्यम से कई बिंदुओं पर चर्चा हुई. धर्मांतरण की रोकथाम को लेकर सरना-सनातन मिलकर कई प्रस्ताव पर सहमति दी। गांव के लगभग 180 आदिवासी परिवार है.
*क्या इसके बाद चंगाई सभाएं बंद हो गई हैं*
प्रखंड के कुछ गांव में चंगाई सभा होती है, परंतु हाटी गांव में चंगाई सभा नहीं होती थी, बल्कि गांव के लोगो को रांची के नगड़ी चर्च में बुलाया जाता था। ग्राम सभा के बाद अब लोग चर्च जाना बंद कर दिए है.
*संस्कृति सभ्यता को बचाना हमारी सोच*
भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत ‘पेसा कानून’ ग्राम सभा को अपनी संस्कृति, सभ्यता, धर्म और परंपराओं के संरक्षण का पूर्ण अधिकार देता है. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सहित माननीय न्यायालयों के विभिन्न निर्णयों ने भी इस अधिकार को पूरी तरह संवैधानिक माना है. अक्सर ग्राम सभा द्वारा लगाए जाने वाले सूचना बोर्डों को लेकर भ्रम फैलाया जाता है, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि इन बोर्डों का उद्देश्य किसी आम नागरिक या विशेष समुदाय (जैसे ईसाई ग्रामीणों) के आने-जाने पर प्रतिबंध लगाना नहीं है. भारत के प्रत्येक नागरिक को अनुच्छेद 19 के तहत देश के किसी भी हिस्से में अबाध संचरण का मूल अधिकार प्राप्त है. यह व्यवस्था केवल प्रलोभन, अंधविश्वास या जबरन धर्मांतरण के उद्देश्य से प्रवेश पर रोक है.
निशा उरांव, IRS, झारखंड
अधिकारियों से बात करने का किया गया प्रयास
इस मामले में एसपी सदीक अनवर रिजवी ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है. मामले की जानकारी लेने के पश्चात ही कुछ बोल सकते है. CO दुर्गा कुमार ने कहा कि मामले की जानकारी नहीं है.
