News Wave Desk : मोर दुनिया के सबसे सुंदर और आकर्षक पक्षियों में से एक है. अपनी रंग-बिरंगी चमकदार पूंछ, मनमोहक नृत्य और मधुर आवाज के कारण यह लोगों का ध्यान आसानी से आकर्षित करता है. भारत में मोर को विशेष सम्मान प्राप्त है, क्योंकि यह देश का राष्ट्रीय पक्षी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पूरी दुनिया में मोर की केवल तीन प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं?
भारतीय मोर
भारतीय मोर सबसे प्रसिद्ध प्रजाति है. इसका वैज्ञानिक नाम Pavo cristatus है. यह भारत, श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान के कुछ क्षेत्रों में पाया जाता है. नर मोर का शरीर चमकीले नीले रंग का होता है और उसकी लंबी, रंग-बिरंगी पूंछ उसकी सबसे बड़ी पहचान है. मादा को मोरनी कहा जाता है, जिसका रंग अपेक्षाकृत हल्का भूरा होता है. भारत में मोर खेतों, जंगलों, गांवों और राष्ट्रीय उद्यानों में आसानी से देखा जा सकता है. वर्षा ऋतु के दौरान नर मोर अपने सुंदर पंख फैलाकर नृत्य करता है, जो प्रकृति के सबसे मनमोहक दृश्यों में से एक माना जाता है.

हरा मोर
हरा मोर का वैज्ञानिक नाम Pavo muticus है. यह मुख्य रूप से म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम और इंडोनेशिया में पाया जाता है. इसके शरीर का रंग हरा और सुनहरा होता है, जिससे यह अत्यंत आकर्षक दिखाई देता है. जंगलों के घटते क्षेत्र और शिकार के कारण इस प्रजाति की संख्या कई स्थानों पर कम हो गई है. इसलिए इसे संरक्षण की आवश्यकता है.

कांगो मोर
कांगो मोर का वैज्ञानिक नाम Afropavo congensis है. यह केवल अफ्रीका के कांगो के घने वर्षावनों में पाया जाता है. यह भारतीय मोर की तुलना में छोटा होता है और इसकी पूंछ भी कम लंबी होती है. यह दुनिया की सबसे दुर्लभ मोर प्रजातियों में से एक मानी जाती है.

मोर कहां पाए जाते हैं?
मोर सामान्यतः जंगलों, खेतों, घास के मैदानों, पहाड़ी क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में पाए जाते हैं. भारत में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़ और कई अन्य राज्यों में इन्हें देखा जा सकता है.मोर सुबह सूर्योदय के समय और शाम के समय सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं. इन्हें देखने का सबसे अच्छा समय वर्षा ऋतु (जून से सितंबर) माना जाता है. इसी मौसम में नर मोर अपने पंख फैलाकर नृत्य करता है और अपनी सुंदरता का प्रदर्शन करता है. मोर केवल अपनी सुंदरता के कारण ही नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन और जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा होने के कारण भी विशेष महत्व रखता है. इनकी सभी प्रजातियों का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अद्भुत पक्षी की सुंदरता का आनंद ले सकें.
