Ranchi: निरसा में प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना अब इंजीनियरिंग का मसला नहीं, बल्कि भाजपा के कब्जे और भाकपा (माले) के अस्तित्व की लड़ाई का अखाड़ा बन चुकी है. एक ही दिन, एक ही मुद्दा, लेकिन दो विपरीत धुरी सांसद ढुल्लू महतो और विधायक अरूप चटर्जी का यह शक्ति प्रदर्शन महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि आने वाले समय में निरसा की राजनीति के बदलने का एक स्पष्ट ट्रेलर है. निरसा में बुधवार का दिन सामान्य नहीं था. मामला केवल सड़क निर्माण का नहीं है. भाजपा और माले दोनों ने ही अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी. भाजपा सांसद ढुल्लू महतो की पदयात्रा और माले विधायक अरूप चटर्जी का मार्च, दोनों का गंतव्य भले ही अलग था, लेकिन लक्ष्य एक ही था, क्षेत्र में अपनी धमक दिखाना.
ढुल्लू महतो: विकास के जरिए विस्तार की रणनीति
भाजपा सांसद ढुल्लू महतो ने निरसा कोटा से हाथबाड़ी तक पदयात्रा निकाली. इसके बाद सभा को संबोधित करते हुए ढुल्लू महतो ने सीधे तौर पर विधायक अरूप चटर्जी पर हमला बोला. उन्होंने दो टूक कहा कि विकास कार्यों में रोड़े अटकाना विधायक की पुरानी आदत बन गई है. स्थानीय विधायक अपनी संकीर्ण राजनीति के चलते बाधा डाल रहे हैं.
अरूप चटर्जी: भ्रष्टाचार के मुद्दे पर माले का पलटवार
दूसरी ओर, भाकपा (माले) विधायक अरूप चटर्जी ने पूरे मामले को विकास के चश्मे से देखने के बजाय भ्रष्टाचार और अतिक्रमण के चश्मे से पेश किया. पार्टी कार्यालय से देवियाना मोड़ तक निकले माले के मार्च ने निरसा की सड़कों पर लाल झंडों की मौजूदगी को और सघन कर दिया. चटर्जी ने एलिवेटेड रोड के ठेके में भाजपा समर्थित ठेकेदारों के शामिल होने का आरोप लगाकर सीधे तौर पर सांसद की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया.
प्रशासनिक सतर्कता और शांतिपूर्ण शक्ति परीक्षण
करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर दो विपरीत विचारधारा वाली सभाएं होना किसी बड़े टकराव की आहट थी. प्रशासन के लिए यह अग्निपरीक्षा से कम नहीं था. पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया था, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पल-पल की जानकारी ले रहे थे. हालांकि, दोनों कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे, लेकिन पुलिस की भारी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि निरसा में सियासी तनाव ‘किसी भी समय’ विस्फोटक रूप ले सकता है.
वर्चस्व की जंग: बाघमारा के बाद निरसा का नंबर
विधायक अरूप चटर्जी ने दबे शब्दों में इस बात को स्वीकार किया कि यह लड़ाई केवल एक सड़क की नहीं है. उन्होंने खुलेआम आरोप लगाया कि ढुल्लू महतो निरसा में अपना राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करना चाहते हैं और बाघमारा के बाद अब धनबाद के अन्य क्षेत्रों को भी वे अपनी राजनीतिक हनक के दायरे में लेना चाहते हैं. फिलहाल, निरसा का सियासी पारा चढ़ा हुआ है. यह परियोजना अब सिर्फ एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि निरसा की अगली राजनीतिक दिशा तय करने वाला एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बन चुकी है.
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