Ranchi: राज्य में गंगा नदी के तटीय क्षेत्रों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है. जल संसाधन विभाग ने गंगा नदी के लिए फ्लड प्लेन जोनिंग (Flood Plain Zoning), भूमि उपयोग नियमन (Land Use Regulation) और सतत बाढ़ जोखिम प्रबंधन के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके लिए विभाग के मुख्य अभियंता (डिजाइन, मास्टर प्लानिंग एवं हाइड्रोलॉजी) की ओर से देश की प्रतिष्ठित एम्पैनल्ड कंसलटेंसी फर्मों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं.
120 दिनों में तैयार होगा पूरा ब्लूप्रिंट
सरकार के अनुसार, इस बेहद संवेदनशील और तकनीकी काम को पूरा करने के लिए 120 दिनों (4 महीने) का समय निर्धारित किया गया है. चुनी जाने वाली कंसलटेंसी फर्म को गंगा नदी के जलस्तर, पिछले बाढ़ के पैटर्न, तटवर्ती इलाकों की मिट्टी की स्थिति और जियो-टेक्नीकल पहलुओं का गहन अध्ययन करना होगा. इसके बाद एक ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा जिससे बाढ़ के खतरे को कम से कम किया जा सके.
क्यों खास है यह योजना
फ्लड प्लेन जोनिंग: इसके तहत गंगा नदी के आसपास के इलाकों को बाढ़ के खतरे के हिसाब से अलग-अलग ‘ज़ोन’ में बांटा जाएगा. किस ज़ोन में निर्माण कार्य हो सकता है और कहाँ बिल्कुल पाबंदी होगी, यह तय होगा.
लैंड यूज़ रेगुलेशन (भूमि नियमन): नदी के बिल्कुल करीब होने वाले अवैध या असुरक्षित निर्माण पर रोक लगाने के लिए कड़े नियम तय किए जाएंगे, ताकि भविष्य में केदारनाथ या अन्य नदियों जैसी आपदा न आए.
अत्याधुनिक तकनीक से सर्वे: कंसलटेंसी फर्म को केंद्रीय जल आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत ऑन-फील्ड सर्वे, कंटूर मैपिंग और कमांड एरिया फिक्सेशन करना होगा.
