26 साल के संघर्ष के बाद कर्मचारी को मिलेगा हक: CCL को हाईकोर्ट का आदेश, बकाया वेतन, पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ छह सप्ताह के भीतर दें

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) को एक पूर्व कर्मचारी के...

After 26 years of struggle, employees will get their dues: High Court orders CCL to pay outstanding wages, pension, gratuity and all other retirement benefits within six weeks

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) को एक पूर्व कर्मचारी के प्रति बरती गई घोर लापरवाही के लिए जवाबदेह ठहराया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि कर्मचारी बैजनाथ महतो को 26 वर्षों के बकाया वेतन के साथ-साथ पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सभी सेवानिवृत्ति लाभ छह सप्ताह के भीतर दिए जाएं. अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी कर्मचारी की बर्खास्तगी को ही रद्द कर दिया गया हो, तो कंपनी नो वर्क, नो पे का तर्क देकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती. यदि नियोक्ता ने समय पर विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं की और कर्मचारी को काम से वंचित रखा, तो इसका खामियाजा उसे ही भुगतना होगा.

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क्या था पूरा मामला?

बैजनाथ महतो को 1981 में नौकरी मिली थी. 1989 में चोरी के एक मामले में फंसने के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया. हालांकि, वे आपराधिक मामले में निर्दोष साबित हुए. 2009 में हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द कर दी और तीन महीने में विभागीय जांच का निर्देश दिया. सीसीएल ने न तो जांच पूरी की और न ही उन्हें बहाल किया, जिससे वे वर्षों तक संघर्ष करते रहे.

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