News Wave Desk : आज के समय में यदि किसी अरबी व्यंजन की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, तो वह है मंडी (Mandi). खुशबूदार बासमती चावल, धीमी आंच पर पका मुलायम चिकन या मटन और खास अरबी मसालों से तैयार यह व्यंजन अब केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत में भी तेजी से लोकप्रिय हो चुका है. होटल और रेस्तरां में मंडी का स्वाद लेने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है.
मंडी की शुरुआत कहां से हुआ
मंडी की शुरुआत यमन के हदरामौत (Hadhramaut) क्षेत्र से मानी जाती है. यह यमन का पारंपरिक व्यंजन है, जिसे सदियों पहले विशेष अवसरों, शादियों और बड़े आयोजनों में बनाया जाता था. धीरे-धीरे यह सऊदी अरब, यूएई, ओमान, कतर और अन्य अरब देशों में लोकप्रिय हुआ. बाद में यमन से लोगों के पलायन के साथ यह व्यंजन भारत के हैदराबाद, केरल, बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली और कई अन्य शहरों तक पहुंचा.
जानिए मंडी बनाने की पारंपरिक विधि
मंडी बनाने की पारंपरिक विधि इसे अन्य चावल के व्यंजनों से अलग बनाती है. सबसे पहले चिकन या मटन को दही और विशेष अरबी मसालों में मेरिनेट किया जाता है. इसके बाद बासमती चावल को इलायची, लौंग, दालचीनी, तेजपत्ता और अन्य खुशबूदार मसालों के साथ पकाया जाता है. पारंपरिक तरीके में मांस को जमीन के भीतर बने मिट्टी के तंदूर या गड्ढेनुमा ओवन में धीमी आंच पर कई घंटों तक पकाया जाता है. इस दौरान मांस का रस और सुगंध चावल में समा जाती है, जिससे इसका स्वाद बेहद खास हो जाता है.

मंडी और बिरयानी में अंतर
विशेषज्ञों के अनुसार मंडी और बिरयानी में सबसे बड़ा अंतर मसालों और पकाने की तकनीक का है. जहां बिरयानी मसालेदार और परतों में पकाई जाती है, वहीं मंडी में हल्के लेकिन खुशबूदार मसालों का इस्तेमाल होता है और इसका स्वाद मांस की प्राकृतिक खुशबू पर आधारित होता है. यही वजह है कि मंडी का स्वाद अलग और संतुलित माना जाता है. आज मंडी कई प्रकारों में उपलब्ध है, जिनमें चिकन मंडी, मटन मंडी, फिश मंडी और वेज मंडी प्रमुख हैं. इसे आमतौर पर टमाटर की तीखी चटनी, दही की डिप और ताजी सलाद के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. भारत में बढ़ते अरबियन फूड कल्चर और नए रेस्तरां के कारण मंडी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. स्वाद, खुशबू और पारंपरिक पकाने की अनोखी विधि के कारण यह व्यंजन आज युवाओं से लेकर परिवारों तक की पहली पसंद बनता जा रहा है.
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