जामताड़ा: 40 लाख का स्वास्थ्य उपकेंद्र तैयार; हैंडओवर नहीं, 300 मीटर दूर शुरू हुआ दूसरा निर्माण

जामताड़ा: जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत बंदरचुआ पंचायत के कोरिडीह-2 गांव में सरकारी राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं....

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40 लाख का स्वास्थ्य उपकेंद्र तैयार, हैंडओवर नहीं

जामताड़ा: जिले के नारायणपुर प्रखंड अंतर्गत बंदरचुआ पंचायत के कोरिडीह-2 गांव में सरकारी राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 40 लाख रुपये की लागत से बना स्वास्थ्य उपकेंद्र अब तक स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया है. इस बीच, उससे लगभग 300 मीटर की दूरी पर एक और स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण शुरू कर दिया गया है.

2021 में हुआ था पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र का शिलान्यास

ग्रामीणों के अनुसार, 14 मार्च 2021 को तत्कालीन विधायक एवं वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK/MSDP) के तहत 40,99,987 रुपये की लागत से बनने वाले स्वास्थ्य उपकेंद्र का शिलान्यास किया था. भवन का निर्माण कुछ महीने पहले पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक इसका संचालन शुरू नहीं हो सका है.

300 मीटर दूर दूसरे भवन का निर्माण शुरू

पहले बने स्वास्थ्य उपकेंद्र से करीब 300 मीटर की दूरी पर भवन निर्माण प्रमंडल, जामताड़ा द्वारा एक और स्वास्थ्य उपकेंद्र का निर्माण कराया जा रहा है. इस नए भवन का शिलान्यास 16 फरवरी 2026 को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने किया था.

स्वास्थ्य विभाग बोला- हैंडओवर नहीं मिला

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पहले बने स्वास्थ्य उपकेंद्र का हैंडओवर अभी तक स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिला है. इसी कारण भवन विभाग के उपयोग में नहीं आ सका है और वहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हुई हैं.

भवन निर्माण विभाग के जवाब में विरोधाभास

भवन निर्माण प्रमंडल, जामताड़ा के सहायक अभियंता अमित कुमार ने पहले दोनों भवनों के बीच करीब एक किलोमीटर की दूरी होने की बात कही. बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने दूसरे भवन का स्थल देखा ही नहीं है. नए भवन की स्वीकृत लागत के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके पास इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है.

योजना की जरूरत या सरकारी धन का दुरुपयोग?

मामले को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि जब लाखों रुपये की लागत से बना पहला स्वास्थ्य उपकेंद्र अब तक उपयोग में नहीं आया है, तो उसके इतने करीब दूसरा स्वास्थ्य उपकेंद्र बनाने की आवश्यकता किस आधार पर तय की गई. ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है. वहीं, यह मामला प्रशासनिक समन्वय, योजना निर्माण और सरकारी धन के उपयोग को लेकर भी कई सवाल खड़े कर रहा है.
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