Bokaro: BSL कर्मी सुभाष चंद्र मोदी की इलाज के दौरान मौत के बाद प्रबंधन की चुप्पी को लेकर परिजनों व स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा. परिजनों और स्थानीय लोगों ने शव के साथ BSL के ADM बिल्डिंग के मुख्य गेट को जाम कर दिया और आश्रित को नियोजन देने की मांग पर अड़ गए. प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले छह दिनों से सुभाष चंद्र मोदी का शव मर्चरी में रखा हुआ था, लेकिन प्रबंधन की ओर से आश्रित को नियोजन (अनुकंपा नौकरी) को लेकर कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया. इससे नाराज परिजनों और ग्रामीणों ने ADM बिल्डिंग के मेन गेट को जाम कर दिया, जिससे आवागमन प्रभावित रहा. माहौल को देखते हुए प्रशासन को भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात करने पड़े.
काम के दौरान हुआ था हादसा, इलाज के दौरान हुई मौत
परिजनों के अनुसार, BSL कर्मी सुभाष चंद्र मोदी 30 जून को प्लांट में ड्यूटी के दौरान हादसे का शिकार हो गए थे. काम के दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी. पहले उन्हें प्लांट मेडिकल में प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया, इसके बाद हालत गंभीर होने पर अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया, जहां लंबा इलाज चला. इलाज के दौरान 17 जुलाई को उनकी मौत हो गई, जिसके बाद से शव मर्चरी में ही रखा हुआ था. परिजन नियोजन की मांग को लेकर आंदोलन की राह पर हैं.
परिजनों का आरोप है कि हादसा प्लांट परिसर में ड्यूटी के दौरान हुआ और वही चोट उनकी मौत का कारण बनी, इसलिए इसे औद्योगिक दुर्घटना मानते हुए आश्रित को जल्द से जल्द नौकरी दी जानी चाहिए. परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान कई बार अस्पताल बदलना पड़ा. बेहतर उपचार के बावजूद सुभाष चंद्र मोदी को बचाया नहीं जा सका. अब कम से कम प्रबंधन को परिवार के भविष्य की जिम्मेदारी लेनी चाहिए. इस प्रदर्शन में स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए. उन्होंने चेतावनी दी कि शीघ्र निर्णय लेते हुए नियोजन नहीं दिया गया तो आंदोलन और उग्र होगा. प्रदर्शनकारियों ने ADM बिल्डिंग के मुख्य गेट पर नारेबाजी करते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति पर जल्द फैसला नहीं होने पर प्लांट के सभी गेटों को जाम कर बड़े पैमाने पर आंदोलन किया जाएगा.
