Chaibasa: सारंडा क्षेत्र स्थित चिड़िया माइंस में लौह अयस्क के परिवहन को लेकर उत्पन्न विवाद का समाधान बातचीत के जरिए हो गया है. इससे क्षेत्र में संभावित आंदोलन की स्थिति टल गई है और खनन कार्य पूर्व की भांति सुचारू रूप से चल रहा है. यह जानकारी देते हुए क्षेत्र के प्रमुख राजू संडिल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से माइंस से गुजरने वाली सड़कों, प्रदूषण और सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी थी. इसी मुद्दे पर ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे थे. लेकिन प्रशासन, कंपनी प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों की पहल पर दोनों पक्षों के बीच सार्थक वार्ता हुई.
ग्रामीणों की समस्याओं पर सकारात्मक पहल का आश्वासन
प्रमुख राजू संडिल के अनुसार बैठक में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं रखीं. उन्होंने कहा कि भारी वाहनों के आवागमन से सड़कें खराब हो रही हैं और धूल व दुर्घटना का खतरा बढ़ रहा है. वहीं कंपनी पक्ष ने आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की जायज मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार किया जाएगा.
वार्ता के बाद यह स्पष्ट हुआ कि लौह अयस्क का परिवहन बंद नहीं किया गया है. कंपनी ने कहा है कि परिवहन जारी रहेगा, लेकिन साथ ही ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए भी कदम उठाए जाएंगे. इसके बाद ग्रामीण भी आंदोलन के फैसले से पीछे हट गए.
विकास के साथ ग्रामीणों की सुविधाओं का ध्यान रखना जरूरी: राजू संडिल
प्रमुख राजू संडिल ने कहा कि चिड़िया माइंस क्षेत्र के विकास और स्थानीय लोगों को रोजगार देने का बड़ा माध्यम है. ऐसे में विकास कार्यों के साथ-साथ ग्रामीणों की सुविधाओं का भी ध्यान रखना जरूरी है. उन्होंने कहा, “संवाद ही किसी भी समस्या का समाधान है. प्रशासन और कंपनी को चाहिए कि वे समय-समय पर ग्रामीणों से बैठक कर उनकी समस्याएं सुनें, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति उत्पन्न न हो.”
वार्ता सफल होने के बाद अब क्षेत्र में शांति है और माइंस से लौह अयस्क का उठाव सामान्य रूप से हो रहा है. स्थानीय लोगों ने भी पहल की सराहना की है और उम्मीद जताई है कि आगे भी इसी तरह आपसी समन्वय से समस्याओं का समाधान होगा. प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कहा है कि वे ग्रामीणों और कंपनी के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत रहेंगे, ताकि खनन कार्य निर्बाध चलता रहे और स्थानीय लोगों को भी किसी तरह की परेशानी न हो.
ALSO READ: रामगढ़: चुटूपालू घाटी में एस्केप लेन से टला बड़ा हादसा, बची दो लोगों की जान
