Ranchi : झारखंड और बिहार राज्य कृषि विपणन पर्षद (विघटित, पटना) के बीच लंबे समय से लंबित संपत्तियों और दायित्वों के बंटवारे की प्रक्रिया अब तेज हो गई है. इस पूरी प्रक्रिया के वित्तीय अंकेक्षण और पारदर्शी निष्पादन के लिए एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट या फर्म की नियुक्ति की जाएगी. झारखंड राज्य कृषि विपणन पर्षद की ओर से जारी सूचना के अनुसार, योग्य फर्मों को अपने पिछले दो वर्षों का कार्य विवरण, फर्म निबंधन पत्र और पैन नंबर के साथ अपनी दरें निर्धारित करनी होंगी.
बदहाल है झारखंड की बाजार समितियां
एक तरफ जहां संपत्तियों के बंटवारे की कवायद चल रही है. वहीं, दूसरी तरफ झारखंड की कृषि बाजार समितियों की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है. राज्यभर में कुल 28 बाजार समिति, 95 उप बाजार प्रांगण और 605 साप्ताहिक हाट बाजार चिन्हित किए गए है. जिनमें रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, बोकारो, देवघर (मधुपुर), गिरिडीह, दुमका और साहिबगंज समेत कई अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल है. इन 28 बाजार समितियों में से 11 समितियां पूरी तरह अस्तित्वहीन होने की कगार पर पहुंच चुकी है. वहीं, 15 बाजार समितियां भारी घाटे में चल रही है. जो किसी तरह अपने फिक्स डिपॉजिट के ब्याज के भरोसे अपना वजूद बचाए हुए है.
कर्मचारियों की भारी कमी, प्रभारी के भरोसे संचालन
पूरे राज्य में बाजार समितियों के संचालन के लिए कुल 935 पद सृजित किए गए है. लेकिन विडंबना यह है कि वर्तमान में मात्र 115 कर्मचारी ही कार्यरत है. भारी रिक्तियों के कारण स्थिति यह है कि राज्य की तमाम बाजार समितियां नियमित अधिकारियों के बजाय केवल प्रभारी सचिवों के जिम्मे संचालित हो रही है.
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