Ranchi : झारखंड के किसानों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता और डिजिटल क्रांति लाने की दिशा में राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के अंतर्गत कृषि निदेशालय ने राज्य के किसानों से मिलने वाले अंशदान (कंट्रीब्यूशन) के सुरक्षित प्रबंधन और त्वरित निष्पादन के लिए नेशनल व पब्लिक सेक्टर बैंकों की मदद लेगी. जिससे किसानों के पैसे का पाई-पाई का हिसाब अब रियल-टाइम डिजिटल टेक्नोलॉजी के जरिए चुस्त-दुरस्त किया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे और समय पर लाभार्थियों तक पहुंच सके.
क्या है पूरी योजना
किसान समृद्धि योजना झारखंड सरकार की एक फ्लैगशिप योजना है. जिसके तहत राज्य के किसानों, एफपीओ FPO और महिला समूहों को 90% तक की भारी सब्सिडी पर सोलर फोटोवोल्टिक वाटर पंपिंग सिस्टम वितरित किए जाते है. ड्रॉप मोर क्रॉप योजना प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का एक केंद्रीय प्रायोजित घटक है, जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों के खेतों में सूक्ष्म सिंचाई परिसंपत्तियों का विकास करना है. इन दोनों ही योजनाओं में किसानों द्वारा अंशदान जमा कराया जाता है. इसी अंशदान के कलेक्शन, मैनेजमेंट, रीकंसीलेशन (मिलान) और सेटलमेंट के लिए बैंकों को आमंत्रित किया गया है.
बैंकों के चयन के लिए कड़े मानक
• व्यापक नेटवर्क : बैंक का भारतीय रिजर्व बैंक के तहत विनियमित होना अनिवार्य है. साथ ही, झारखंड के सभी 24 जिलों में उसकी शाखाएं होनी चाहिए और राज्यभर में कम से कम 100 बैंक शाखाएं मौजूद होनी चाहिए.
• तकनीकी दक्षता : बैंक के पास एपीआई API आधारित एकीकरण की मजबूत क्षमता, यूपीआई UPI, नेट बैंकिंग और अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा फ्रेमवर्क होना चाहिए.
• अनुभव : बैंक के पास पिछले 5 वर्षों में कम से कम 10 सरकारी परियोजनाओं, डीबीटी DBT प्लेटफॉर्म या डिजिटल कलेक्शन सिस्टम को संभालने का ठोस अनुभव होना चाहिए.
• वित्तीय सुदृढ़ता : बैंक की नेटवर्थ सकारात्मक होनी चाहिए और वह किसी भी सरकारी विभाग या न्यायालय द्वारा ब्लैकलिस्टेड नहीं होना चाहिए.
क्या होगी बैंकिंग पार्टनर की जिम्मेदारी
• विविध भुगतान विकल्प : किसानों को कैश, एनईएफटी NEFT, आरटीजीएस RTGS, आईएमपीएस IMPS, यूपीआई UPIऔर नेट बैंकिंग के जरिए अंशदान जमा करने की सुविधा देना.
• वर्चुअल अकाउंट सिस्टम : हर लाभार्थी के लिए एक विशेष वर्चुअल अकाउंट नंबर बनाना और रियल-टाइम डिजिटल रसीद जारी करना.
• दैनिक मिलान और रिपोर्टिंग : हर दिन के लेन-देन का ऑटोमैटिक मिलान करना, असफल या डुप्लीकेट ट्रांजैक्शन की पहचान करना और सरकार को दैनिक, साप्ताहिक व मासिक एमआईएस MIS रिपोर्ट सौंपना.
• समयबद्ध रिफंड और सेटलमेंट : विभाग के अनुमोदन के बाद 7 कार्यदिवसों के भीतर रिफंड प्रक्रिया पूरी करना और तय नियमों के तहत फंड को संबंधित एजेंसियों तक ट्रांसफर करना.
