Hazaribagh : गुणवत्तापूर्ण और बेहतर शिक्षा का सपना संजोए बीपीएल BPL परिवार के मासूम बच्चों की उम्मीदें हजारीबाग के नामचीन निजी स्कूलों की हठधर्मिता और मनमानी के आगे दम तोड़ती नजर आ रही है. जिला प्रशासन की सीधी निगरानी में पारदर्शी तरीके से निकाली गई लॉटरी प्रक्रिया में चयन के बावजूद दर्जनों बच्चों का नामांकन अब तक अधर में लटका हुआ है. नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब छह महीने बीत चुके है. लेकिन निजी स्कूलों के चक्कर काट-काटकर निराश अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल की चौखट से वापस घर ले जाने को मजबूर है.
गेट बंद कर रोके जा रहे अभिभावक
अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि कई निजी स्कूल दाखिला देने के नाम पर टालमटोल की नीति अपना रहे है. कभी कागजातों में त्रुटि बताकर तो कभी घर से स्कूल की दूरी का बहाना बनाकर फॉर्म खारिज किए जा रहा है. कुछ स्कूलों पर दाखिले की एवज में अवैध वसूली के गंभीर आरोप भी लगे है. इतना ही नहीं, एक स्कूल प्रबंधन ने तो फरियाद लेकर पहुंचे गरीब अभिभावकों को परिसर में प्रवेश से रोकने के लिए मुख्य गेट पर ही ताला जड़ दिया. उल्लेखनीय है कि गत 11 जुलाई को उपायुक्त और शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में बीपीएल बच्चों के लिए लॉटरी निकाली गई थी. जिसमें 139 बच्चों का चयन हुआ था. नियमानुसार चयनित बच्चों का तुरंत एडमिशन होना था, लेकिन नमन विद्या मंदिर समेत कई प्रतिष्ठित स्कूलों में प्रक्रिया अब भी अटकी पड़ी है.
छिन चुकी नौकरी के बीच पिता का छलका दर्द
खीरगांव निवासी पीड़ित अभिभावक राजेश कुमार ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि हाल ही में नौकरी छूटने के कारण उनका परिवार भारी आर्थिक तंगी से गुजर रहा है. सरकारी योजना के तहत जब बच्चे का चयन लॉटरी में हुआ तो उन्हें एक नई उम्मीद जगी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन आज आओ, कल आओ कहकर लगातार गुमराह कर रहा है. उनका मासूम बेटा रोज पूछता है कि वह नए कपड़े और बैग पहनकर स्कूल कब जाएगा, लेकिन बेबस पिता के पास देने के लिए कोई जवाब नहीं होता. अभिभावकों का तर्क है कि जब शिक्षा विभाग लॉटरी से पहले ही सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर चुका था, तो चयन के बाद स्कूल प्रशासन को नए-नए बहाने बनाकर बच्चों का भविष्य अधर में लटकाने का हक किसने दिया.
RTE की मंशा पर उठे गंभीर सवाल, नमन विद्या मंदिर ने साधी चुप्पी
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए है. गरीब माता-पिता को अब यह डर सताने लगा है कि उनके बच्चों के सपने सरकारी दफ्तरों और निजी स्कूलों की लालफीताशाही के बीच ही न पिस जाये. इस मामले में जब नमन विद्या मंदिर प्रबंधन से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो स्कूल प्रशासन की ओर से केवल इतना कहा गया कि प्राचार्य उपलब्ध नहीं हैं और उनके लौटने के बाद ही कोई अधिकारिक बयान दिया जाएगा. खबर लिखे जाने तक विद्यालय की ओर से कोई स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं हुआ.
