JPSC घोटाला: अब ED की एंट्री की मांग, पूर्व विधायक सीता सोरेन ने लिखा पत्र, बोलीं- PMLA के तहत केस दर्ज कर बेनामी संपत्तियों को फ्रीज किया जाए

प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को पत्र भेजकर ईसीआईआर दर्ज करने का किया आग्रह; कहा- राज्य पुलिस और सीआईडी सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी जांच...

JPSC scam: Former MLA Sita Soren writes to demand ED's entry, says benami properties should be frozen by filing a case under PMLA
  • प्रवर्तन निदेशालय के निदेशक को पत्र भेजकर ईसीआईआर दर्ज करने का किया आग्रह; कहा- राज्य पुलिस और सीआईडी सिर्फ प्रशासनिक गड़बड़ी जांच रही, अवैध धन की जब्ती का अधिकार केवल ईडी के पास है

Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में अनियमितता, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का मामला अब केवल राज्य पुलिस और अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) तक सीमित नहीं रहेगा. जामा की पूर्व विधायक एवं बाल विकास समिति की पूर्व सभापति सीता सोरेन ने शनिवार (25 जुलाई) को प्रर्वतन निदेशालय (ईडी) के निदेशक (नई दिल्ली) को पत्र लिखकर इस महाघोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की तुरंत एंट्री की मांग की है . सीता सोरेन ने ईडी निदेशक और रांची क्षेत्रीय कार्यालय को भेजे पत्र (पत्रांक 1240/AA/25-26) में मांग की है कि इस पूरे मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईसीआईआर दर्ज कर जांच शुरू की जाए . उन्होंने जेपीएससी के अधिकारियों, दागी एजेंसियों और बिचौलियों के बैंक खातों व अवैध संपत्तियों की जांच कर उन्हें तुरंत फ्रीज करने का आग्रह किया है.

JPSC scam: Former MLA Sita Soren writes to demand ED's entry, says benami properties should be frozen by filing a case under PMLA

सीता सोरेन ने पत्र में उठाए ED की जांच से जुड़े 3 मुख्य बिंदु

1. करोड़ों का अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका: पत्र में कहा गया है कि जेपीएससी द्वारा आयोजित परीक्षाओं (14वीं सिविल सेवा परीक्षा सहित) के परिणामों में भारी अनियमितताएं हुई हैं . योग्य अभ्यर्थियों को दरकिनार कर अपात्र लोगों को बैकडोर एंट्री देने के लिए करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन और रिश्वतखोरी हुई है, जो सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है .

2. दागी कंपनियों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों की संलिप्तता: पूर्व में ब्लैकलिस्टेड हो चुकी आउटसोर्सिंग एजेंसी टीडीपीएल को परीक्षा का गोपनीय काम सौंपना गंभीर वित्तीय सांठगांठ और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है .

3. काली कमाई को ‘सफेद’ कर रहे प्रशासनिक अधिकारी व बिचौलिए: सीता सोरेन ने आरोप लगाया है कि जेपीएससी के तत्कालीन शीर्ष अधिकारियों, उप परीक्षा नियंत्रक और बाहरी दलालों का एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है, जो अवैध धन को सफेद करने में लगा है .

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