रांची: झारखंड में आदिवासी जमीन के हस्तांतरण का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. महालेखाकार (एजी) ने राज्य सरकार से इस संबंध में आवश्यक दस्तावेज मांगे हैं, ताकि आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की जांच की जा सके. महालेखाकार की इस पहल के बाद राज्य सरकार के स्तर पर हलचल तेज हो गई है.

सरकार ने विधि विभाग से मांगा मंतव्य
महालेखाकार की ओर से पत्र प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विधि विभाग से मंतव्य मांगा है. सरकार का कहना है कि विधि विभाग की राय मिलने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
SAR कोर्ट बंद होने के बाद बढ़े विवाद
झारखंड में वर्ष 2015 में स्पेशल एरिया रेगुलेशन (SAR) कोर्ट बंद किए जाने के बाद भी आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के मामले पूरी तरह नहीं थमे हैं. तत्कालीन सरकार ने यह फैसला इस उद्देश्य से लिया था कि आदिवासी समुदाय को जमीन से जुड़े मामलों में ठगी का शिकार होने से बचाया जा सके, लेकिन कई मामलों में इसका उल्टा असर देखने को मिला.
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SAR कोर्ट की थी अहम भूमिका
एसएआर कोर्ट में आदिवासी जमीन की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों की सुनवाई होती थी. अदालत जमीन वापसी के आदेश देने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर जमीन के एवज में क्षतिपूर्ति देने का भी निर्णय करती थी. कोर्ट बंद होने के बाद भी जमीन की खरीद-बिक्री के कई मामले सामने आते रहे हैं.
आदिवासी अधिकारों पर उठ रहे सवाल
आदिवासी जमीन के हस्तांतरण और अवैध खरीद-बिक्री की घटनाओं के कारण आदिवासी समुदाय के भूमि अधिकारों के संरक्षण को लेकर फिर से सवाल उठने लगे हैं. महालेखाकार द्वारा दस्तावेज मांगे जाने के बाद अब इस पूरे मामले की जांच और संभावित कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है.

