बालूमाथ अंचल में पंजी-II को लेकर गहराया विवाद, तत्कालीन CI ने साजिश और आर्थिक दोहन का लगाया आरोप

रांची: लातेहार जिला के बालूमाथ अंचल में जमीन से जुड़े एक मामले में पंजी-II (Register-II) को लेकर मचे घमासान ने अब एक...

रांची: लातेहार जिला के बालूमाथ अंचल में जमीन से जुड़े एक मामले में पंजी-II (Register-II) को लेकर मचे घमासान ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. तत्कालीन अंचल निरीक्षक (सीआई) सत्यम भारद्वाज द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों ने पूरे घटनाक्रम पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. इस मामले में न केवल बैक डेट से कार्रवाई करने के आरोप लगे हैं, बल्कि एक उच्चाधिकारी पर आर्थिक दोहन और साजिश रचने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं.

रिसीविंग और दस्तावेजों का खेल:

तत्कालीन सीआई के द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अनुसार, पूरा विवाद पंजी-II के हस्तांतरण और उसकी जांच को लेकर है. तत्कालीन सीआई सत्यम भारद्वाज के अनुसार, 19 मई 2021 को राजस्व उप निरीक्षक मनोज बेक ने विधिवत पावती के साथ पंजी-II उपलब्ध कराई थी. इसके अगले दिन, 20 मई को मनोज बेक, जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता और सीआई ने संयुक्त रूप से इसकी जांच की थी. तत्कालीन सीआई का तर्क है कि जब कागजातों का लेन-देन आधिकारिक रिसीविंग के माध्यम से किया गया, तो इसे ‘स्वेच्छाचारिता’ या जबरन कब्जा कैसे कहा जा सकता है? यह एक पूर्णतः सरकारी प्रक्रिया थी.

स्थानांतरण के बाद साजिश की बू?

मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जब तक सत्यम भारद्वाज बालूमाथ में पदस्थापित थे (15 जून 2021 तक), तब तक उनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई और न ही कोई स्पष्टीकरण मांगा गया. आरोप है कि उनके खलारी (रांची) स्थानांतरण के बाद, पूरे मामले को बैक डेट में दर्ज कर उन्हें फंसाने की साजिश रची गई. मनोज बेक की ओर से दो आवेदन (25 मई और 28 मई 2021) दिए गए, जिनमें विरोधाभास नजर आता है. आवेदनों में खुद मनोज बेक की उपस्थिति का जिक्र है, जिसकी पुष्टि वीडियो से होने का दावा भी किया गया है. इसके बावजूद जांच प्रतिवेदन में कहा गया कि मनोज बेक पंजी-II देखने नहीं गए थे, न तो मनोज बेक की गवाही दर्ज की गई और न ही मौके पर मौजूद जगन्नाथ प्रसाद गुप्ता से पूछताछ हुई.

उच्चाधिकारी पर गंभीर आरोप: आर्थिक दोहन बनी प्राथमिकता?

इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन सीआई ने एक उच्चाधिकारी (तत्कालीन अपर समाहर्ता, लातेहार) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. सीआई का आरोप है कि उक्त अधिकारी का मुख्य उद्देश्य आर्थिक दोहन करना था. सत्यम भारद्वाज ने इस संबंध में विभाग को नामजद शिकायत भी भेजी थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. गौरतलब है कि उक्त अधिकारी को हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में पदोन्नति भी मिली है.

रैयती भूमि और क्षेत्राधिकार का सवाल:

दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख है कि संबंधित भूमि रैयती है और किसी भी रैयत (जमीन मालिक) ने इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है. नियमानुसार यदि भूमि के हस्तांतरण में कोई अनियमितता होती है, तो उसका समाधान व्यवहार न्यायालय में होना चाहिए, न कि प्रशासनिक स्तर पर साजिश रचकर अंचलाधिकारी द्वारा बैक डेट से की गई कार्रवाई उनकी अपनी कार्यशैली पर सवाल उठाती है. कार्यालय पंजी में छेड़छाड़ के आरोप से सीआई को बरी कर दिया गया क्योंकि इसमें खुद अंचलाधिकारी के फंसने की संभावना थी. मनोज बेक के खिलाफ अब तक कोई कार्रवाई न होना इस बात की पुष्टि करता है कि उन्हें दबाव में गवाह बनाया गया.


 

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