रांची: झारखंड हाई कोर्ट के न्यायाधीश संजय कुमार द्विवेदी ने आज जमशेद अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए यह पाया कि घटना होने के 2 सालों बाद प्राथमिकी दर्ज की गई, जहां अदालत ने जमशेद अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह कहा कि यदि किसी घटना के प्राथमिकी में देरी होती है तो उसे स्पष्ट करना बेहद जरुरी है, अदालत में याचिका के पूर्व यह सुनिश्चित किया जाए की पीड़ित विशेष कारणवश अपनी गुहार लगाने से वंचित रहा, अदालत ने ये भी कहा कि देरी से दर्ज हुए मामले अक्सर षड्यंत्र पर आधारित होते हैं इसलिए इसे पुख्ता एव ठोस प्रमाणित करने के लिए दर्ज प्राथमिकी में इसका जिक्र स्पष्टता से होना चाहिए.
क्या है मामला
दरअसल गिरिडीह के एक युवती का गर्भपात युवक के साथ हुए झगड़े के बाद कराना पड़ा, हालांकि बाद में समझौता के बाद दोनों साथ रहने लगे थे वहीं अचानक 2 सालों बाद पीड़िता ने प्राथमिक की दर्ज कराई जहां अदालत इसे अप्राकृतिक करार देते हुए उक्त केस के आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी.
