झारखंड में माओवाद कमजोर, अब संगठित अपराध पर पुलिस का बड़ा एक्शन

Ranchi: झारखंड में माओवाद अब खत्म होने की ओर है, लेकिन इसके साथ ही संगठित अपराध (ऑर्गेनाइज्ड क्राइम) पुलिस के लिए नई...

Jharkhand police
Maoism weakened in Jharkhand (AI IMAGE)

Ranchi: झारखंड में माओवाद अब खत्म होने की ओर है, लेकिन इसके साथ ही संगठित अपराध (ऑर्गेनाइज्ड क्राइम) पुलिस के लिए नई चुनौती बनकर उभर रहा है. हाल के वर्षों में कई बड़े माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि कई सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए हैं. माओवाद पर नियंत्रण पाने में झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की अहम भूमिका रही है. मई महीने में झारखंड पुलिस मुख्यालय में 27 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की थी. वहीं अब 16 और नक्सली भी मुख्यधारा में लौट रहे हैं. इससे पहले भी कई इनामी माओवादी हथियार छोड़ चुके हैं.

संगठित अपराध बना नई चुनौती

माओवाद के कमजोर पड़ने के बाद अब राज्य के कई जिलों में संगठित आपराधिक गिरोह सक्रिय हो रहे हैं. कोयलांचल क्षेत्र से लेकर राजधानी रांची तक रंगदारी, लेवी वसूली और गैंगवार की घटनाएं सामने आ रही हैं. इससे कारोबारियों, ठेकेदारों और व्यापारियों में चिंता का माहौल है.

पुलिस मुख्यालय ने बनाई नई रणनीति

बढ़ते संगठित अपराध को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों (एसपी) को अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है. अपराधियों पर कार्रवाई के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जा रहे हैं, जिनमें डीएसपी, इंस्पेक्टर और दरोगा स्तर के अधिकारी शामिल होंगे.

आर्थिक नेटवर्क पर होगी कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि संगठित अपराधी रंगदारी और जबरन वसूली के जरिए अपना नेटवर्क मजबूत कर रहे हैं. ऐसे में पुलिस अब इन गिरोहों के आर्थिक स्रोतों पर भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है. मुख्यालय स्तर पर एक विशेष सेल 24 घंटे अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह माओवाद को प्रभावी कार्रवाई के जरिए कमजोर किया गया, उसी तरह संगठित अपराध पर भी सख्त कार्रवाई कर उसे नियंत्रित किया जाएगा.

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