Simdega: थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों को नियमित एवं सुरक्षित रूप से रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया को लेकर मंगलवार को सिमडेगा सदर अस्पताल के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों एवं एएनएम को थैलेसीमिया रोगियों की देखभाल और सुरक्षित रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई.कार्यशाला में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. टुडू ने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी, समय पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता तथा रक्त चढ़ाने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया एक गंभीर अनुवांशिक रक्त रोग है, जिसमें बच्चों को नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है. ऐसे में स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है.
स्वास्थ्यकर्मियों ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं और विशेषज्ञों से किया अपने प्रश्नों का समाधान
उन्होंने एएनएम को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों और उनके परिजनों को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं, रक्त उपलब्धता एवं उपचार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराएं. साथ ही रक्त चढ़ाने के दौरान यदि किसी प्रकार की प्रतिकूल प्रतिक्रिया या समस्या दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित करें. कार्यशाला का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को थैलेसीमिया रोगियों के बेहतर उपचार, नियमित फॉलोअप और सुरक्षित रक्त आधान की प्रक्रिया के प्रति प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाना था. इस दौरान उपस्थित स्वास्थ्यकर्मियों ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी प्राप्त की और विशेषज्ञों से अपने प्रश्नों का समाधान भी किया.
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