Bokaro : अपनों के बेहतर भविष्य और दो वक्त की रोटी की तलाश में सात समंदर पार गए गोमिया के एक मजदूर की वतन वापसी तो हुई, लेकिन ताबूत में. गोमिया प्रखंड अंतर्गत चतरोचट्टी थाना क्षेत्र के कतवारी गांव निवासी प्रवासी मजदूर सत्येंद्र महतो की सऊदी अरब में सड़क हादसे में मौत हो गयी थी. मौत के ठीक एक महीने बाद बुधवार को उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा. जैसे ही एंबुलेंस शव लेकर कतवारी पहुंची, पूरा इलाका चीख-पुकार और मातम में डूब गया. मृतक के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. पति के शव से लिपटकर रोती पत्नी और बदहवास बच्चों का हाल देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं. मृतक अपने पीछे दो बेटा और एक बेटी छोड़ गया है. जिसमें 21 वर्षीया बेटी प्रीति कुमारी, बेटे अरविंद और 13 वर्षीय मंगेश है.
ट्रक ड्राइवर था सत्येंद्र
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, सत्येंद्र महतो 26 नवंबर 2024 को रोजगार के सिलसिले में सऊदी अरब गया था. जहां वो हमद सालेह अल-काफ कॉन्ट्रैक्टिंग एस्टैब्लिशमेंट नाम की कंपनी में बतौर ट्रक ड्राइवर काम कर रहा था. बीते 25 जून 2026 को एक भीषण सड़क दुर्घटना में उसकी मौत हो गई. कागजी प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय औपचारिकताओं के चलते शव को स्वदेश लाने में एक माह का लंबा वक्त लग गया.
एक महीने का समय पीड़ादायक
सांत्वना देने पहुंचे प्रवासी मजदूरों के अधिकारों के लिए प्रयासरत सामाजिक कार्यकर्ता सिकंदर अली ने इस घटना पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि विदेशों में काम करने वाले झारखंडी मजदूरों की मौत के बाद उनके शव को वतन लाने में लगने वाला महीनों का समय अत्यंत पीड़ादायक है. यह कोई पहला मामला नहीं है. सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे परिजनों को अपनों के अंतिम संस्कार के लिए इतना लंबा इंतजार न करना पड़े.
