Ranchi: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन के अध्यक्ष (स्पीकर) रवींद्र नाथ महतो के एक सशक्त, प्रेरणादायी और दूरदर्शी संबोधन के साथ विधिवत कार्यवाही का आगाज हुआ. छठी झारखंड विधानसभा के इस षष्ठम मानसून सत्र के ऐतिहासिक अवसर पर स्पीकर ने लोकतंत्र के मूल मंत्रों, संवाद, सहिष्णुता और जनहित को रेखांकित करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि झारखंड की जनता ने हम सभी को जिस अटूट विश्वास के साथ इस सदन में भेजा है, हमारे प्रत्येक शब्द, आचरण और निर्णय उसी कसौटी पर परखे जाएंगे. 6 अगस्त से 12 अगस्त तक चलने वाले इस छह दिवसीय महत्वपूर्ण सत्र में राज्य के विकास, वित्तीय अनुशासन और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए कई अहम कार्यसूचियां निर्धारित की गई हैं.

विधानसभा एक भवन नहीं, लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच है
स्पीकर ने कहा कि विधानसभा केवल एक भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र का सर्वोच्च जनमंच है, जहां जनता की उम्मीदों को मूर्त रूप दिया जाता है. विधेयकों पर गहन विचार-विमर्श कर राज्य हित में कानून बनाना, राज्य की वित्तीय व्यवस्था, बजट की समीक्षा और उसका विधिवत अनुमोदन करना, कार्यपालिका को जनता के प्रति उत्तरदायी और पारदर्शी बनाए रखना भी इसके संवैधानिक दायित्व हैं. इन दायित्वों के निर्वहन के क्रम में ही इस मानसून सत्र की रूपरेखा तय की गई है. सत्र के दौरान सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक बजट सदन के पटल पर प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य के विकास कार्यों और जनहित योजनाओं को गति प्रदान करने के लिए वित्तीय संसाधनों का मार्ग प्रशस्त होगा.

प्रश्नकाल और गैर सरकारी सदस्य का कार्य
लोकतंत्र में जनता के सवालों को सीधे सरकार तक पहुंचाने और शासन को जवाबदेह बनाने के लिए प्रश्नकाल की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. इस छह दिवसीय सत्र में कुल पांच कार्य दिवस पूरी तरह से प्रश्नकाल के लिए आरक्षित किए गए हैं. इसके माध्यम से माननीय सदस्यों को जनहित से जुड़े तीखे, सार्थक और जरूरी सवाल पूछने तथा सरकार से सीधा उत्तर प्राप्त करने का भरपूर अवसर मिलेगा. सत्र की परंपरा के अनुरूप 12 अगस्त, 2026 को गैर सरकारी सदस्य का कार्य दिवस निर्धारित किया गया है. यह दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के माननीय सदस्यों को व्यक्तिगत या जनहित के विशेष विषयों, सुझावों और नीतिगत पहलों को स्वतंत्र रूप से सदन के समक्ष रखने का अवसर प्रदान करता है. स्पीकर ने उम्मीद जताई कि इस अवसर का उपयोग सदन की गरिमा को ध्यान में रखते हुए पूरी तन्मयता के साथ किया जाएगा.

राष्ट्रीय औसत से आगे झारखंड विधानसभा
सत्र के दौरान झारखंड विधानसभा के कार्यनिष्पादन को लेकर एक बेहद संतोषजनक और गर्व करने योग्य आंकड़ा सदन के सामने रखा गया. स्पीकर ने कहा कि हाल ही में राज्य विधानसभाओं के कार्यनिष्पादन पर पीआरएस द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में देश के 28 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं की औसत बैठक अवधि मात्र 24 दिन रही. इसके विपरीत, झारखंड विधानसभा ने गत वर्ष कुल 30 दिनों तक सत्र का सफल संचालन किया, जो राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है. स्पीकर ने इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय सदन के सभी सदस्यों की सक्रिय सहभागिता, अनुशासन और संसदीय प्रतिबद्धता को दिया. उन्होंने विश्वास जताया कि इस मानसून सत्र की सभी बैठकों को पूरी गंभीरता और रचनात्मकता के साथ चलाकर झारखंड विधानसभा इस गौरवशाली परंपरा को इस वर्ष भी कायम रखेगी.
बदलते वैश्विक दौर में नई चुनौतियां और हमारी जिम्मेदारी
आज पूरी दुनिया विज्ञान, प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन और तीव्र आर्थिक बदलाव के एक अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रही है. विकास की इन नई आवश्यकताओं ने शासन-व्यवस्था के सामने नए अवसर तो पैदा किए हैं, साथ ही नई जिम्मेदारियां भी खड़ी की हैं. इन परिस्थितियों में झारखंड जैसे विकासशील राज्य के लिए यह अनिवार्य हो जाता है कि कृषि और किसानों की आय में वृद्धि हो. युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं. शिक्षा और स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए. समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सामाजिक समरसता और जनकल्याणकारी योजनाएं पहुंचें. इन तमाम महत्वपूर्ण विषयों पर इस सत्र के दौरान गंभीर, तथ्यपरक और उच्चस्तरीय वैचारिक मंथन की जरूरत पर जोर दिया गया.
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सत्ता पक्ष और विपक्ष लोकतंत्र के पूरक अंग
लोकतंत्र केवल बहुमत के बल पर चलने वाली व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह आपसी संवाद, सहिष्णुता और एक-दूसरे के विचारों के सम्मान की जीवंत संस्कृति है. सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही लोकतांत्रिक व्यवस्था के दो अत्यंत महत्वपूर्ण और पूरक अंग हैं. वैचारिक मतभेद होना लोकतंत्र में एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, परंतु सदन के भीतर जनहित सदैव सर्वोपरि रहना चाहिए. स्वस्थ संवाद, तार्किक बहस और एक-दूसरे के प्रति सकारात्मक सहयोग ही किसी भी लोकतांत्रिक संस्था की असली ताकत होती है. स्पीकर ने कहा कि झारखंड की सवा करोड़ जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए हमें इस मानसून सत्र को पूरी तरह अनुशासित, गरिमामय, परिणामोन्मुख और जनोन्मुख बनाना होगा. यहां होने वाला प्रत्येक विचार-विमर्श राज्य की प्रगति, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती और जनता के अटूट विश्वास को नई ऊंचाइयां देगा.

