Ranchi: झारखंड में इस साल मानसून की चाल काफी सुस्त और निराशाजनक रही है. राज्यभर में बादलों की आवाजाही तो बनी हुई है, लेकिन बारिश के अभाव में खेतों और जलाशयों की प्यास नहीं बुझ पा रही है. 1 जून से 6 अगस्त तक के मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में सामान्य से 24 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. राज्य के लगभग सभी जिलों में बादलों की मेहरबानी कम ही देखने को मिली है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ नजर आने लगी हैं. धान की रोपनी का मुख्य समय होने के कारण पानी की कमी ने कृषि कार्यों की रफ्तार पर बड़ा ब्रेक लगा दिया है.

इन जिलों की स्थिति चिंताजनक
चतरा और गढ़वा में मानसून सबसे ज्यादा रूठा है. इन दोनों ही जिलों में 60 फीसदी कम बारिश हुई है. पाकुड़ 53 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है. इसी तरह देवघर में 48 प्रतिशत, कोडरमा में 47 प्रतिशत, पलामू में 43 प्रतिशत, गिरिडीह में 41 प्रतिशत, और हजारीबाग में 36 प्रतिशत बारिश कम हुई है. राजधानी रांची की बात करें तो यहां 9 फीसदी बारिश कम हुई है.

कुछ ही जिलों में स्थिति संतोषजनक
पश्चिमी सिंहभूम इकलौता ऐसा जिला है जहां 13 प्रतिशत सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है. वहीं सिमडेगा में 8 प्रतिशत, रांची में 9 प्रतिशत, सरायकेला-खरसावां में 4 प्रतिशत, पूर्वी सिंहभूम में 11 प्रतिशत, और दुमका में 14 प्रतिशत बारिश कम हुई है. जून और जुलाई का महीना धान के बिचड़े गिराने और खेतों में रोपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।.लेकिन पर्याप्त बारिश न होने के कारण कई इलाकों में खेत सूखे पड़े हैं और किसानों को पंपसेट या बोरिंग के सहारे काम चलाना पड़ रहा है, जो महंगा साबित हो रहा है। यदि आने वाले दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ, तो सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं और खरीफ फसलों के उत्पादन पर भारी असर पड़ सकता है.

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