Ranchi: झारखंड में वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षाबलों के निरंतर चले अभियान, पुनर्वास नीतियों और सख्त कार्रवाई के कारण माओवादियों का मजबूत किला ध्वस्त हो चुका है. हाल ही में एक करोड़ रुपये के इनामी और भाकपा माओवादी के शीर्ष पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर दा की धनबाद से ऐतिहासिक गिरफ्तारी तथा ‘ऑपरेशन नवजीवन’ के तहत दर्जनों शीर्ष कमांडरों के आत्मसमर्पण के बाद राज्य में लाल आतंक की कमर पूरी तरह टूट गई है. गृह विभाग और झारखंड पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब राज्य में केवल 19 इनामी फरार नक्सली ही शेष बचे हैं. 19 इनामी नक्सलियों में पांच पश्चिम बंगाल के रहने वाले है, एक बिहार का और बाकी 13 नक्सली झारखंड का रहने वाला है.

हाल के दिनों बड़ी सफलताएं: गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण
– एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी: 141 से अधिक गंभीर मामलों में वांछित भाकपा माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को सुरक्षा बलों ने धनबाद जिले के मनियाडीह क्षेत्र से गिरफ्तार किया. मिसिर बेसरा को सारंडा और कोल्हान के जंगलों में माओवादी नेटवर्क का अंतिम बड़ा स्तंभ माना जाता था.

– सामूहिक आत्मसमर्पण (ऑपरेशन नवजीवन): मई और जुलाई 2026 के दौरान चलाए गए अभियानों में 42 से अधिक माओवादियों (जिसमें कई जोनल और एरिया कमांडर शामिल थे) ने एक साथ पुलिस के समक्ष सरेंडर किया. इसके बाद अन्य सक्रिय कैडरों ने भी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया.

– अनल दा का खात्मा: शीर्ष माओवादी एक करोड़ इनामी अनल दा सहित कई बड़े चेहरों के मुठभेड़ में मारे के जाने के बाद झारखंड पूरी तरह नक्सल-मुक्त घोषित होने के कगार पर है.

झारखंड में बचे अंतिम 19 इनामी फरार नक्सलियों की पूरी सूची
– एक करोड़ इनामी असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर: भाकपा माओवादी
– 25 लाख इनामी ब्रजेश सिंह गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरकार: टीपीसी
– 15 लाख इनामी रामप्रसाद माझी उर्फ सचिन माझी: भाकपा माओवादी
– 15 लाख इनामी नितेश यादव उर्फ इरफान उर्फ नन्दू उर्फ किरानी: भाकपा माओवादी
– 10 लाख इनामी आरिफ जी उर्फ शशिकान्त उर्फ सुदेश जी उर्फ सुरेश जी: टीपीसी
– 10 लाख इनामी मनोहर गंझू उर्फ सोहन गंझू उर्फ दिनेश गंझू: भाकपा माओवादी
– 10 लाख इनामी गोदराय यादव उर्फ संजय यादव: भाकपा माओवादी
– 10 लाख इनामी पुष्पा महतो उर्फ शकुंतला उर्फ पेरी: भाकपा माओवादी
– 10 लाख इनामी गीता उर्फ नयनतारा उर्फ सुरुज उर्फ परी: भाकपा माओवादी
– पांच लाख इनामी समीर महतो उर्फ मगरा: भाकपा माओवादी
– पांच लाख इनामी पंकज कोरवा: भाकपा माओवादी
– पांच लाख इनामी राजू भुइयां: भाकपा माओवादी
– पांच लाख इनामी रामदेव लोहरा उर्फ साधु उर्फ काछर: जेजेएमपी
– दो लाख इनामी मालती मुर्मू: भाकपा माओवादी
– दो लाख इनामी बलराम लोहरा उर्फ जटू उर्फ मजनू: पीएलएफआई
– एक लाख इनामी वासु पुर्ती: भाकपा माओवादी
– एक लाख इनामी शमूएल बुढ़ उर्फ शामू: पीएलएफआई
– एक लाख इनामी कोदोगुणी कोड़ा: भाकपा माओवादी
– एक लाख इनामी खोगे पुर्ती उर्फ गुरूचरण: भाकपा माओवादी
सुरक्षाबलों का कड़ा रुख और पुनर्वास नीति का असर
झारखंड पुलिस और राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि बचे हुए नक्सलियों के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं या तो वे सरकार की ‘नई दिशा’ पुनर्वास नीति के तहत पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा सुरक्षा बल कठोर सैन्य कार्रवाई द्वारा उन्हें समाप्त कर देंगे. कोल्हान, पलामू और लातेहार क्षेत्र के सुदूर जंगलों में सर्च ऑपरेशन लगातार जारी हैं, जिससे राज्य जल्द ही पूरी तरह से लाल आतंक के साये से मुक्त होने की राह पर अग्रसर है.
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