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जमशेदपुर: 39वें शहादत दिवस पर शहीद निर्मल महतो को दी गई श्रद्धांजलि

Jamshedpur: झारखंड आंदोलन के महानायक शहीद निर्मल महतो का 39वां शहादत दिवस आज पूरे राज्य में सम्मान के साथ मनाया गया. 8...

जमशेदपुर
शहीद निर्मल महतो

Jamshedpur:  झारखंड आंदोलन के महानायक शहीद निर्मल महतो का 39वां शहादत दिवस आज पूरे राज्य में सम्मान के साथ मनाया गया. 8 अगस्त 1987 को इसी दिन जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित चमरिया गेस्ट हाउस के बाहर निर्मल दा पर गोलियां चलाई गई थीं. महज 36 साल की उम्र में उन्होंने अलग झारखंड राज्य के सपने को साकार करने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दे दिया था. उनकी शहादत ने आंदोलन को नई दिशा और रफ्तार दी, जिसकी परिणति वर्ष 2000 में अलग झारखंड राज्य के गठन के रूप में हुई.

उलियान में उमड़ा जनसैलाब

कदमा स्थित उलियान में उनके समाधि स्थल और प्रतिमा पर आज सुबह से ही लोगों का तांता लगा रहा. झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित तमाम राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और आम नागरिकों ने पहुंचकर शहीद की प्रतिमा और समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए. नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें नमन करते हुए उनके योगदान को याद किया. कई लोग भावुक होकर उनकी तस्वीर पर माथा टेकते नजर आए.

अस्मिता और न्याय के प्रतीक थे निर्मल महतो

वक्ताओं ने कहा कि निर्मल महतो सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं थे. वे झारखंड की अस्मिता, स्वाभिमान और न्याय के प्रतीक थे. उन्होंने शोषण और अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद की और अलग राज्य के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया. श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने युवाओं से निर्मल महतो के आदर्शों पर चलकर झारखंड के विकास में योगदान देने का आह्वान किया.

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