Khunti: धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के 126वें शहादत दिवस के अवसर पर सोमवार को उनकी जन्मस्थली उलिहातू श्रद्धा, सम्मान और जनभावनाओं का केंद्र बनी रही. जिला प्रशासन द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने भाग लेकर महान स्वतंत्रता सेनानी को नमन किया. उपायुक्त मो. जावेद हुसैन एवं पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग ने उलिहातू स्थित भगवान बिरसा मुंडा की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए. इसके पश्चात अधिकारियों ने भगवान बिरसा मुंडा कॉम्प्लेक्स पहुंचकर वहां स्थापित प्रतिमा पर भी पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी.
भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और बलिदान को किया याद
उपायुक्त मो. जावेद हुसैन ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं. उन्होंने अपने साहस, संघर्ष और बलिदान से जनजातीय समाज में नई चेतना का संचार किया तथा स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा प्रदान की. उनके आदर्श आज भी समाज को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं. श्रद्धांजलि कार्यक्रम के बाद उपायुक्त ने भगवान बिरसा मुंडा के वंशजों से मुलाकात कर उनके जीवन, संघर्ष और बलिदान को याद किया. उन्होंने कहा कि उलिहातू जैसी ऐतिहासिक धरती पर भगवान बिरसा मुंडा का जन्म होना पूरे झारखंड और देश के लिए गर्व की बात है.

इस दौरान उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक ने स्थानीय बच्चों से संवाद कर उन्हें नियमित रूप से विद्यालय जाने तथा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया. अधिकारियों ने ग्रामीणों और अभिभावकों से भी बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा ही समाज के सर्वांगीण विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है. जिला प्रशासन जनहित और क्षेत्रीय विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है.
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युवाओं से बिरसा के आदर्शों को अपनाने की अपील
पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग एवं उप विकास आयुक्त प्रवीण कुमार प्रकाश ने युवाओं से भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को आत्मसात करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का जीवन युवाओं में समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पण, संघर्ष और नेतृत्व की भावना जगाता है. उल्लेखनीय है कि भगवान बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को उलिहातू में हुआ था. उन्होंने ब्रिटिश शासन के शोषण और दमन के विरुद्ध ऐतिहासिक उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व कर जनजातीय अस्मिता और अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी. मात्र 25 वर्ष की आयु में 9 जून 1900 को रांची कारागार में उनका निधन हुआ, लेकिन उनका संघर्ष और बलिदान आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बना हुआ है.
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त प्रवीण कुमार प्रकाश, अपर समाहर्ता, प्रभारी अनुमंडल पदाधिकारी, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला खेल पदाधिकारी, सहायक अभियंता (भवन प्रमंडल), प्रखंड विकास पदाधिकारी सहित जिला एवं प्रखंड स्तरीय अनेक अधिकारी उपस्थित थे. साथ ही बड़ी संख्या में ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने अमर शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की.
