Hazaribagh:बड़कागांव क्षेत्र में साइबर ठगों ने लोगों को ठगने का नया तरीका अपनाया है. अब ठग RTO चालान जमा करने के नाम पर लोगों के मोबाइल पर फर्जी लिंक भेज रहे हैं. लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल हैक हो रहा है और कुछ ही देर में बैंक खातों से रुपये गायब किए जा रहे हैं. लगातार सामने आ रही घटनाओं से इलाके में दहशत का माहौल है.

छोटे चालान का डर दिखाकर भेज रहे फर्जी लिंक
साइबर अपराधी लोगों के मोबाइल पर SMS और व्हाट्सएप संदेश भेज रहे हैं. संदेश में लिखा जाता है कि वाहन का RTO चालान बकाया है और तुरंत भुगतान नहीं करने पर गाड़ी जब्त कर ली जाएगी. लोगों को डराने के लिए 10, 50 या 100 रुपये जैसे छोटे चालान का उल्लेख किया जाता है, ताकि लोग बिना सोचे-समझे लिंक खोल दें.
लिंक क्लिक करते ही हैंग हुआ मोबाइल, खाते से गायब हुई रकम
बड़कागांव प्रखंड के सोनपुरा निवासी भवानी दांगी के मोबाइल पर दो दिन पहले ऐसा ही एक संदेश आया. संदेश में RTO चालान जमा करने की बात लिखी थी और नीचे भुगतान के लिए एक लिंक दिया गया था. भवानी दांगी ने घबराकर लिंक पर क्लिक किया. लिंक खुलते ही मोबाइल हैंग हो गया और कुछ देर बाद व्हाट्सएप अपने आप बंद होने लगा. बाद में जब उन्होंने बैंक बैलेंस जांचा तो खाते से बड़ी रकम गायब मिली.
महिला भी बनी साइबर ठगी की शिकार
इसी तरह बड़कागांव चट्टी निवासी बिंदु दांगी भी साइबर ठगी का शिकार हो गईं. उनके मोबाइल पर भी RTO चालान का फर्जी संदेश भेजा गया था. लिंक खोलते ही मोबाइल हैक हो गया और UPI के जरिए खाते से बड़ी रकम निकाल ली गई. इतना ही नहीं, ठगों ने उनके व्हाट्सएप अकाउंट का इस्तेमाल कर रिश्तेदारों और परिचितों से भी पैसे मांगने की कोशिश की.
ऐसे काम करता है साइबर ठगों का नेटवर्क
जानकारी के अनुसार, APK ऐप के फर्जी लिंक पर क्लिक करते ही मोबाइल में मालवेयर या जासूसी ऐप इंस्टॉल हो जाता है. इसके बाद ठगों को मोबाइल का एक्सेस मिल जाता है. इसके जरिए साइबर अपराधी OTP हासिल कर लेते हैं, बैंक डिटेल चुरा लेते हैं, व्हाट्सएप और गैलरी तक पहुंच बना लेते हैं. UPI और नेट बैंकिंग का दुरुपयोग कर खाते खाली कर देते हैं.
थाना प्रभारी ने जारी की चेतावनी
बड़कागांव थाना प्रभारी ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है. उन्होंने कहा कि RTO या ट्रैफिक पुलिस इस तरह व्हाट्सएप लिंक भेजकर भुगतान की मांग नहीं करती. उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध संदेश मिलने पर तुरंत उसकी जांच करें.
