तम्बाकू के दुष्प्रभाव पर बोकारो के कथारा ओपी क्षेत्र में जनजागरूकता रैली निकाली गई

Bokaro: विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 31 मई के पूर्व शुक्रवार को कथारा ओपी क्षेत्र में तम्बाकू एवं नशा के दुष्प्रभाव के प्रति...

Bokaro: विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 31 मई के पूर्व शुक्रवार को कथारा ओपी क्षेत्र में तम्बाकू एवं नशा के दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जनजागरूकता रैली, हस्ताक्षर अभियान एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सिविल सर्जन बोकारो के निर्देशानुसार कथारा ओपी बोकारो पुलिस, तम्बाकू नियंत्रण इकाई बोकारो एवं राष्ट्रीय सेवा योजना केबी कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम किया गया.

रैली और हस्ताक्षर अभियान के जरिए लोगों को किया गया जागरूक

कार्यक्रम के तहत जागरूकता रैली निकालकर लोगों को तम्बाकू सेवन से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई. साथ ही तम्बाकू छोड़ने हेतु टॉल फ्री नंबर 1800112356 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया. साथ ही कोटपा अधिनियम-2003 के विभिन्न प्रावधानों के अनुपालन को लेकर भी लोगों को जागरूक किया गया.

सिविल सर्जन डॉ. अभय भूषण प्रसाद ने बताया कि झारखंड में कुल जनसंख्या का लगभग 38.9 प्रतिशत लोग तम्बाकू का उपयोग करते हैं, जिनमें 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 5.1 प्रतिशत बच्चे भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों एवं युवाओं को नशे की लत से बचाना समाज एवं सभी विभागों की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग एवं जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता से ही नशा मुक्त समाज का निर्माण संभव है.

एक महीने तक चलेगा जागरूकता अभियान

उन्होंने जानकारी दी कि 26 मई से 26 जून तक जिले में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से तम्बाकू एवं नशा विरोधी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. इस दौरान शपथ ग्रहण, जागरूकता रैली, बैठक, कोटपा-2003 के प्रावधानों के अनुपालन तथा एनडीपीएस एक्ट-1985 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विशेष अभियान संचालित किए जा रहे हैं.

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कोटपा अधिनियम के तहत दुकानों पर हुई कार्रवाई

टॉल फ्री नंबर के प्रचार-प्रसार के लिए कई ऑटो पर पोस्टर चस्पा किया गया. साथ ही, हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों को यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि तम्बाकू शरीर के लगभग हर हिस्से को नुकसान पहुंचाता है. साथ ही कोटपा-2003 के विभिन्न प्रावधानों के अनुपालन हेतु छह दुकानों का चालान किया गया, जिनसे 650 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूला गया.

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