Banka: जिले के मंदार की ऐतिहासिक और पावन धरती पर स्थित प्रसिद्ध भगवान मधुसूदन मंदिर शनिवार को श्रद्धा, भक्ति और अटूट विश्वास का गवाह बना. अवसर था पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के प्रतीक ‘वट सावित्री व्रत’ का. शनिवार सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर में सुहागिन महिलाओं का तांता लगना शुरू हो गया, जो देखते ही देखते एक बड़े जनसैलाब में बदल गया. पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाओं की उपस्थिति से पूरा परिसर भक्तिमय और उत्सव के रंग में डूब गया.
रंग-बिरंगी साड़ियों और पारंपरिक गीतों से गूंजा परिसर:
सुबह से ही रंग-बिरंगी साड़ियों, सोलह श्रृंगार और हाथों में पूजा की थाल लिए सुहागिन महिलाओं के आने का सिलसिला जारी रहा. मंदिर परिसर में कदम रखते ही हर तरफ पारंपरिक मंगल गीत और ‘सावित्री-सत्यवान’ की जय-जयकार सुनाई देने लगी. महिलाओं ने सबसे पहले भगवान मधुसूदन के दर्शन कर आशीर्वाद लिया और फिर मंदिर परिसर व आसपास मौजूद वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की ओर रुख किया. व्रती महिलाओं ने पूरी श्रद्धा और नियम-निष्ठा के साथ वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की. पूजा की थाल में शामिल फल, फूल, भीगे हुए चने, रौली, अक्षत और सूत के धागे से भगवान विष्णु और माता सावित्री का ध्यान किया गया. महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और रक्षा का संकल्प लेते हुए वट वृक्ष के चारों ओर कच्चे सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा की.

