Ranchi:राज्य में उच्च शिक्षा से जुड़े दो बड़े फैसलों के विरोध में आज ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया और पुतला दहन कर अपना आक्रोश जताया. प्रदर्शनकारियों ने रांची विश्वविद्यालय के 18 कॉलेजों में पीजी पाठ्यक्रम बंद किए जाने तथा बीआईटी मेसरा में झारखंडी छात्रों के लिए 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त करने के निर्णय को छात्र विरोधी करार दिया.

शिक्षा व्यवस्था कमजोर की जा रही है
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए आइसा झारखंड की राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप ने कहा कि राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि क्लस्टर विश्वविद्यालय प्रणाली लागू होने के बाद से ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं, जिनसे विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर सिमटते जा रहे हैं. 18 कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई बंद होने से हजारों छात्र-छात्राओं को अपने जिले और आसपास के क्षेत्रों में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। इससे न केवल नामांकन प्रभावित होगा, बल्कि शोध और अकादमिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा.
भविष्य के साथ खिलवाड़
आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने कहा कि बीआईटी मेसरा में स्थानीय छात्रों के लिए आरक्षित 50 प्रतिशत होम स्टेट कोटा समाप्त करना झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. उन्होंने कहा कि जिस संस्थान की स्थापना राज्य की भूमि और संसाधनों पर हुई है, वहां झारखंडी छात्रों के अधिकारों को समाप्त करना अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य है. उन्होंने सरकार और संस्थान प्रबंधन से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की.
आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा के अवसर बढ़ाने के बजाय सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन लगातार ऐसे कदम उठा रहे हैं, जिनसे गरीब, ग्रामीण और वंचित तबके के छात्रों की पहुंच उच्च शिक्षा तक और कठिन हो रही है. छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि इन फैसलों को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा.
