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हजारीबाग में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और अवैध कोयला खनन से जुड़े आरोपों की होगी जांच, शपथपत्र दाखिल

Hazaribagh: हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) मौन प्रकाश के विरुद्ध लगाए गए भ्रष्टाचार, अवैध वसूली तथा अवैध कोयला...

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Allegations regarding corruption, illegal extortion, and illegal coal mining in Hazaribagh

Hazaribagh: हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल के वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) मौन प्रकाश के विरुद्ध लगाए गए भ्रष्टाचार, अवैध वसूली तथा अवैध कोयला खनन से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच की प्रक्रिया तेज हो गई है. इसी क्रम में JMM नेता शंभूलाल यादव ने विभाग के अवर सचिव मितरंजू कुमार को अपना विधिवत शपथपत्र एवं आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा दिए हैं.

मौन प्रकाश के विरुद्ध भ्रष्टचार एवं अवैध वसूली तस्करी समेत कई आरोप

शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को दिए अपने परिवाद में आरोप लगाया है कि वर्ष 2024 से हजारीबाग पश्चिमी वन प्रमंडल में पदस्थापित DFO मौन प्रकाश विकास योजनाओं में कथित रूप से सात प्रतिशत हिस्सेदारी लेते हैं. इसके अलावा कोयला परिवहन करने वाले वाहनों से प्रतिदिन अवैध वसूली किए जाने का भी आरोप लगाया गया है. शिकायत में यह भी कहा गया है कि हजारीबाग-बरही मुख्य मार्ग, चौपारण में कथित रूप से नया वन जांच नाका केवल वसूली के उद्देश्य से स्थापित किया गया, जबकि चोरदाहा में पहले से ही वन जांच चौकी संचालित है. शिकायतकर्ता ने इसकी वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है. परिवाद में बड़कागांव क्षेत्र में कथित अवैध कोयला खनन से जुड़े गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं तथा पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की गई है.

पत्राचार नहीं, ठोस कार्रवाई हो

शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में कहा है कि अब तक कार्रवाई केवल पत्राचार तक सीमित रहने के कारण संबंधित अधिकारी का मनोबल बढ़ा है और इससे सरकार एवं वन विभाग की छवि प्रभावित हो रही है. उन्होंने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि “न्याय केवल किया ही न जाए, बल्कि होता हुआ भी दिखाई देना चाहिए” तथा “न्याय में अनावश्यक विलंब, न्याय से वंचित किए जाने के समान है.” उन्होंने विभाग से निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने, जांच की प्रगति से अवगत कराने तथा यदि जांच अधिकारी बिना उचित कारण के विलंब करते हैं या पक्षपात अथवा लापरवाही प्रथम दृष्टया सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है.

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