Chatra : प्रतापपुर प्रखंड इन दिनों भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और सरकारी योजनाओं की लूट का नया एपीसेंटर बन गया है. अब तक इस लूट में सिर्फ कंप्यूटर ऑपरेटर, रोजगार सेवक और भ्रष्ट जनप्रतिनिधि ही रडार पर थे, लेकिन अब जांच की आंच प्रखंड के सबसे बड़े अधिकारी यानी प्रतापपुर बीडीओ तक पहुंच गई है. टंडवा पंचायत के मुखिया की कुर्सी छिनने के बाद अब बीडीओ साहब की गर्दन पर भी तलवार लटक चुकी है. मनरेगा, जो गरीबों को रोजगार देने की योजना है, उसे इन सफेदपोशों ने अपनी कमाई की मशीन बना लिया. मजदूरों के बजाय रातों-रात जेसीबी मशीनों से काम कराए गए. बिना काम किए ही फर्जी बिल बने और मुखिया, रोजगार सेवक, बीपीओ और कनीय अभियंताओं के सिंडिकेट ने मिलकर लाखों रुपये डकार लिए. इस महाघोटाले में टंडवा पंचायत के मुखिया रामकेश्वर यादव उर्फ किशोर यादव पर डीसी का पहला चाबुक चला और उनकी सभी शक्तियां सीज कर दी गयी. विश्वस्त सूत्रों की मानें तो प्रतापपुर के कई अन्य भ्रष्ट मुखिया भी अब प्रशासन की हिट-लिस्ट में हैं. जिससे पूरे प्रखंड के जनप्रतिनिधियों की रातों की नींद उड़ी हुई है.
प्रतापपुर की 401 शिकायतें दर्ज
इस पूरी लूट-खसोट में सबसे बड़ा सवाल प्रतापपुर के बीडीओ अभिषेक कुमार पांडेय की कार्यशैली पर खड़ा हुआ है. आरोप है कि बीडीओ ने सब कुछ जानते हुए भी अपनी आंखें मूंदे रखी. उनकी लापरवाही का आलम यह है कि पूरे जिले में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार की शिकायतें इसी प्रखंड से आयी. सीपीग्राम्स (ब्च्ळत्।डै) पोर्टल पर प्रतापपुर प्रखंड की कुल 401 शिकायतें दर्ज हैं. हैरानी की बात तो यह है कि बीडीओ अभिषेक पांडेय को उनके उच्चाधिकारियों ने दिसंबर 2025 से जून 2026 के बीच तीन-तीन बार शो-कॉज नोटिस जारी किया. लेकिन सिस्टम के नशे में चूर बीडीओ ने किसी भी नोटिस का जवाब देना जरूरी नहीं समझा. जांच के निर्देश मिलने पर भी खुद जाने के बजाय, बीडीओ साहब अपने कर्मियों से रिपोर्ट मंगाकर खानापूर्ति करते रहे.

जवाब नहीं देने पर होगी कार्रवाई
अब इस मामले में चतरा के डीसी रवि आनंद ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है. डीसी ने प्रतापपुर बीडीओ को अंतिम शो-कॉज जारी करते हुए महज 24 घंटे के भीतर सबूतों के साथ स्पष्टीकरण मांगा है. डीसी ने साफ और कड़ी चेतावनी दी है कि अगर निर्धारित 24 घंटों में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो इसे सरकारी सेवक आचरण नियमावली का घोर उल्लंघन मानते हुए प्रपत्र के तहत उनके विरुद्ध सीधे आरोप पत्र (चार्जशीट) गठित कर एकपक्षीय विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.
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