विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: राजस्थान की एक विशेष अदालत ने झारखंड के धनबाद के रहने वाले प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकी मोहम्मद अम्मार यासर की जमानत रद्द कर दी है. सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद यासर ने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया और दोबारा राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया, जिसके बाद जोधपुर सिविल कोर्ट के एडिशनल सेशन जज ने यह सख्त कदम उठाया है. अम्मार यासर फिलहाल रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद है.
सुप्रीम कोर्ट से मिली थी राहत
धनबाद के रहने वाले अम्मार यासर को सुप्रीम कोर्ट ने 3 मई 2024 को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह दोबारा किसी अपराध में शामिल नहीं होगा. लेकिन जेल से बाहर आते ही वह फिर से देश विरोधी साजिशों में शामिल हो गया.
ATS की कार्रवाई
इसका खुलासा तब हुआ, जब झारखंड आतंकवाद विरोधी दस्ता (ATS) ने 26 अप्रैल 2025 को उसके खिलाफ एक नया मामला, कांड संख्या 6/2025, दर्ज किया और 30 अप्रैल 2025 को उसे झारखंड से दोबारा गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तारी के दौरान उसके मोबाइल से कई संदिग्ध और आपत्तिजनक सामग्रियां बरामद हुईं, जिसके बाद उसने अवैध गतिविधियों में शामिल होने की बात भी कबूल की.
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पुराना आतंकी मामला
वर्ष 2014 में राजस्थान ATS और दिल्ली पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में इंडियन मुजाहिदीन के राजस्थान मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था. इस मॉड्यूल को पाकिस्तानी आतंकी जिया-उर-रहमान उर्फ वकास ने धमाकों के लिए ट्रेनिंग दी थी. तब जोधपुर से भारी मात्रा में विस्फोटक और बम बनाने की सामग्री मिली थी.
गंभीर आरोप
यासर पर जोधपुर के मंडोर गार्डन में गुप्त बैठक करने और युवाओं को आतंकी संगठन में जोड़ने का आरोप है. मार्च 2021 में जयपुर की अदालत ने यासर समेत 12 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि जोधपुर की अदालत में इससे जुड़ा एक मामला अभी भी लंबित है.
बेल याचिका भी खारिज
झारखंड से जुड़े मामले में अम्मार यासर ने ATS की विशेष कोर्ट से बेल मांगी थी, लेकिन ATS कोर्ट ने उसे बेल देने से इनकार करते हुए उसकी जमानत याचिका अप्रैल महीने में खारिज कर दी थी. अम्मार यासर के अलावा शबनम परवीन, मोहम्मद सज्जाद आलम, गुलफाम हसन और आयान जावेद को भी ATS ने गिरफ्तार किया था.



