Bermo: बेरमो अनुमंडल के पेंक नारायणपुर थाना क्षेत्र में साढ़े चार माह पूर्व हुए बहुचर्चित गोली कांड मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. घटना के इतने लंबे समय बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ पूरी तरह खाली हैं, न तो मामले का उद्भेदन हो सका है और न ही किसी आरोपी की गिरफ्तारी की जा सकी है. पुलिस की इस सुस्त कार्रवाई से पीड़ित परिवार में पुलिस और व्यवस्था के प्रति गहरा असंतोष है.

क्या है मामला?
यह सनसनीखेज मामला बीती 21 जनवरी की रात की है, जब रामाहरिया स्थित जगदंबा कोल फैक्ट्री की मालकिन शिव कुमारी अपने पुत्र डॉ. शिवम कुमार के साथ फैक्ट्री से रात्रि करीब 11 बजे अपनी कार संख्या जेएच 09एटी-7328 से हजारीबाग के लिए निकली थीं. इसी दौरान पिलपिलो स्थित फुटबॉल मैदान के समीप घात लगाए बैठे दो बाइकों पर सवार चार अज्ञात युवकों ने उनकी कार पर अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. अचानक हुए इस जानलेवा हमले के बाद डॉ. शिवम ने सूझबूझ दिखाई और कार को तेजी से बोकारो थर्मल की ओर भगाते हुए स्थानीय थाने में जाकर शरण ली. अपराधियों द्वारा चलाई गईं कई गोलियों के निशान कार पर साफ नजर आ रहे थे,जिससे हमले की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है.
घटना के बाद बोकारो थर्मल थाना प्रभारी पिंकू कुमार यादव ने डरी-सहमी शिव कुमारी को तत्काल डीवीसी अस्पताल में भर्ती कराया. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उसी रात बेरमो एसडीपीओ बशिष्ठ नारायण सिंह सहित कई थानों की पुलिस अस्पताल पहुंची और पीड़ितों से जानकारी लेने के बाद घटनास्थल का मुआयना किया. अगले ही दिन बोकारो एसपी हरबिंदर सिंह ने भी स्वयं मौके पर पहुंचकर तकनीकी जांच व निरीक्षण के निर्देश दिए थे.
नामजद एफआईआर के बाद भी जांच के नाम पर नतीजा शून्य
घटना के बाद फैक्ट्री मालकिन शिव कुमारी के बयान पर पेंक नारायणपुर थाना में कांड संख्या 05/2026 के तहत नामजद प्राथमिकी भी दर्ज कराई गई थी. उच्च अधिकारियों की सक्रियता और नामजद एफआईआर के बावजूद साढ़े चार महीने बीत जाने पर भी जांच के नाम पर नतीजा शून्य रहा है. पीड़ित पक्ष का सीधा आरोप है कि पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है और जानबूझकर मामले में बैकफुट पर रहकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है. अपराधियों की खुलेआम आवाजाही से पीड़ित परिवार अब भी दहशत में जीने को मजबूर है. वहीं दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर पेंक नारायणपुर थाना प्रभारी नीतिश कुमार का कहना है कि मामला फिलहाल यथावत बना हुआ है और अब तक इस कांड में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है. पुलिस के इस ढुलमुल रवैये और जांच की कछुआ गति ने स्थानीय कानून-व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और आम जनता का पुलिसिया कार्रवाई से भरोसा उठता जा रहा है.
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