Hazaribagh: जिस सफलता पर पूरे इलाके में ढोल-नगाड़ों की गूंज थी, जिस मुकाम को पाने के बाद सम्मान समारोहों में बड़े-बड़े भाषण दिए जा रहे थे और गले में फूलों की भारी मालाएं डालकर संघर्ष की मिसालें दी जा रही थीं. उस सफलता के पीछे जुर्म की एक ऐसी काली और खौफनाक पटकथा लिखी जा चुकी थी, जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी. समाज जिन्हें कड़ी मेहनत का प्रतिफल मानकर पलकों पर बिठा रहा था, वही नाम अब सूबे के सबसे बड़े सेटर सिंडिकेट के सूत्रधार बनकर सामने आए हैं. सोमवार की सुबह, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के शांत पड़े पौता गांव में एक सन्नाटा पसर गया. सादे लिबास में CID की विशेष गाड़ियों के साथ चार-चार थानों मुफस्सिल, लोहसिंहना, कोर्रा और सदर की भारी पुलिस फोर्स ने एक मकान की घेराबंदी कर ली.

5 घंटे तक चला सर्च ऑपरेशन, बड़कागांव तक हड़कंप
घड़ी में ठीक सुबह के 6 बज रहे थे, जब CID के जासूसों ने स्थानीय निवासी के घर पर अचानक दस्तक दी. घर के सदस्यों को संभलने या बाहर संदेश भेजने का कोई अवसर नहीं दिया गया. पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था. इसके बाद शुरू हुआ घर के भीतर गहन तलाशी का वो 5 घंटे लंबा दौर, जिसने इस पूरे मामले में सनसनी पैदा कर दी. CID के अफसरों ने कमरे के एक-एक कोने, अलमारियों और लॉकरों को खंगाला. परिजनों से आमने-सामने बिठाकर तीखे सवाल पूछे गए. गांव में 5 घंटे तक चले इस भीषण तलाशी अभियान के बाद जांच की यह तपिश यहीं नहीं रुकी, बल्कि इसके तार सीधे बड़कागांव क्षेत्र के कई गुप्त ठिकानों तक पहुंच गए, जहां देर रात तक छापेमारी का दौर चलता रहा.
सिंडिकेट का मास्टरप्लान: एक भाई की कुर्सी, दूसरे का सेटर गैंग
जांच में जब इस पूरे नेटवर्क की परतें उधड़ीं, तो अधिकारियों के भी होश उड़ गए. इस पूरे खेल का ढांचा दो भाइयों प्रदीप यादव और लालू यादव की खतरनाक जुगलबंदी पर टिका हुआ था. दोनो भाइयों के इस ताने-बाने में एक भाई ने जेपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा पास करके खुद को समाज के सामने एक होनहार अभ्यर्थी के रूप में स्थापित कर लिया था. वहीं दूसरा भाई पर्दे के पीछे रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं में बैकडोर एंट्री कराने वाले बड़े सेटर गिरोह का संचालन कर रहा था. यानी एक भाई की सफलता को ढाल बनाकर बाजार में भरोसा खरीदा जाता था और फिर उस भरोसे के नाम पर दूसरे अभ्यर्थियों का सौदा किया जाता था.
करोड़ों के हस्ताक्षरित चेक और एडमिट कार्ड का जखीरा बरामद
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सर्च ऑपरेशन के दौरान सीआईडी के हाथ वो पुख्ता सुराग लगे हैं, जो इस पूरे फर्जीवाड़े के वित्तीय और रणनीतिक ताने-बाने को नंगा करते हैं. घर के गुप्त ठिकानों से करोड़ों रुपये के ब्लैंक और हस्ताक्षरित बैंक चेक बरामद किए गए हैं. इसके साथ ही उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े कई अभ्यर्थियों के मूल एडमिट कार्ड और महत्वपूर्ण वित्तीय कागजात भी जब्त किए गए हैं. इन ब्लैंक चेकों की मौजूदगी इस बात की साफ गवाही दे रही है कि नौकरी का पक्का वादा करके अभ्यर्थियों के परिजनों से गारंटी के तौर पर यह मोटी रकम वसूली जा रही थी.
गोपनीय स्थान पर महापूछताछ: क्या ढेर होंगे कई सफेदपोश?
सीआईडी ने कई लोगों को अपनी कस्टडी में ले लिया है और उन्हें किसी अज्ञात व गोपनीय स्थान पर रखकर गहन पूछताछ की जा रही है. जब्त किए गए एडमिट कार्ड्स पर लिखे रोल नंबरों और चेकों पर दर्ज हस्ताक्षरों के आधार पर उन अभ्यर्थियों की कुंडली खंगाली जा रही है, जिन्होंने पैसों के दम पर सिस्टम को खरीदने की कोशिश की थी. सूत्रों का दावा है कि इस पूछताछ में कई बड़े दलालों, सिस्टम के भीतर बैठे सहयोगियों और समाज में बड़े पद पर बैठे सफेदपोशों के चेहरे से नकाब उतरना तय माना जा रहा है. जिन नामों पर कल तक मंचों से तालियां बजती थीं, आज उन पर कानून का सबसे सख्त शिकंजा कस चुका है.

