Bokaro: चास स्थित राम रुद्र सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस परिसर में पद्मभूषण स्वर्गीय शिबू सोरेन की स्मृति में स्थापित गुरुजी रात्रि पाठशाला में मंगलवार को भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त अजय नाथ झा, उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार, प्रशिक्षु आईएएस अरविंद राधाकृष्णन, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रवीण रंजन, जिला शिक्षा अधीक्षक अतुल कुमार चौबे सहित अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्वलित कर किया.

शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम : उपायुक्त
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपायुक्त अजय नाथ झा ने कहा कि गुरुजी का संपूर्ण जीवन संघर्ष, शिक्षा और सामाजिक चेतना का प्रतीक रहा है. उन्होंने कहा कि गुरुजी की विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी आज की युवा पीढ़ी पर है. उनके विचारों और जीवन-दर्शन को आत्मसात कर समाज के विकास में योगदान देना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी. उपायुक्त ने कहा कि गुरुजी ने अपने जीवन की व्यक्तिगत पीड़ा को समाज परिवर्तन की शक्ति बनाया. उन्होंने बहुत पहले समझ लिया था कि समाज की अधिकांश समस्याओं की जड़ अशिक्षा है. इसी सोच के साथ उन्होंने गांव-गांव में रात्रि पाठशालाओं की शुरुआत की, जहां दिनभर काम करने वाले लोग रात में शिक्षा ग्रहण कर सकें.उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र-छात्रा में आत्मविश्वास होना चाहिए तथा अपने विचारों को निर्भीकता से रखने की आदत विकसित करनी चाहिए. यही नेतृत्व का प्रथम गुण है.

नशामुक्ति और शिक्षा को अपनाने का किया आह्वान
उपायुक्त ने कहा कि गुरुजी ने नशामुक्त समाज का सपना देखा था. नशा व्यक्ति की प्रतिभा, क्षमता और भविष्य को नष्ट कर देता है. जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो शिक्षा के साथ अनुशासन और नशामुक्त जीवनशैली को अपनाना होगा.उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रति जागरूकता, संवेदनशीलता और सही सोच का विकास भी शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य है. लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों के प्रति आस्था रखते हुए समाज और राज्य के विकास के लिए कार्य करना ही गुरुजी के विचारों का मूल संदेश है.

रात्रि पाठशाला बनेगी सभी वर्गों के लिए ज्ञान का केंद्र
उपायुक्त ने कहा कि गुरुजी रात्रि पाठशाला केवल एक भवन नहीं, बल्कि ज्ञान, जागरूकता और सामाजिक परिवर्तन का केंद्र बनेगी. भविष्य में इसे और विकसित किया जाएगा ताकि यहां बच्चे, युवा, महिलाएं तथा बुजुर्ग सभी अध्ययन कर सकें और अपने ज्ञान का विस्तार कर सकें.
गुरुजी का संघर्ष आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा : डीडीसी
उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने कहा कि पद्मभूषण दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन का संघर्षपूर्ण जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है. उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष उनकी अंतिम यात्रा के दौरान हजारों लोगों की स्वतःस्फूर्त उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया था कि गुरुजी लोगों के दिलों में किस प्रकार बसे हुए थे.उन्होंने कहा कि किशोरावस्था में ही पिता की हत्या जैसी दुखद घटना के बाद भी गुरुजी ने हार नहीं मानी, बल्कि शोषित, वंचित और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया. लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और सामाजिक न्याय के लिए संगठित किया.
युवाओं को दिए तीन महत्वपूर्ण संदेश
डीडीसी ने कहा कि गुरुजी के जीवन से युवाओं को तीन प्रमुख संदेश ग्रहण करने चाहिए – अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना, शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति मानना तथा समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लेना.उन्होंने कहा कि गुरुजी ने धानकटनी आंदोलन, वनाधिकार, भूमि अधिकार, विस्थापितों के अधिकार और सामाजिक न्याय के लिए ऐतिहासिक संघर्ष किए. शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए उन्होंने रात्रि पाठशाला जैसी अभिनव पहल की, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी शिक्षा से जुड़ सकें.
प्रतिभागियों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा पूर्व में आयोजित निबंध प्रतियोगिता के सफल प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया. इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के छात्रों ने दिशोम गुरु के जीवनी पर प्रकाश भी डाला.
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