BREAKING -झारखंड पुलिस: स्पेशल ब्रांच के 300 से अधिक सब-इंस्पेक्टरों के ‘क्लोज कैडर’ मामले में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में स्पेशल ब्रांच (विशेष शाखा) में पदस्थापित 300 से अधिक पुलिसकर्मियों के ‘क्लोज कैडर’ से जुड़े विवादित मामले पर...

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट में स्पेशल ब्रांच (विशेष शाखा) में पदस्थापित 300 से अधिक पुलिसकर्मियों के ‘क्लोज कैडर’ से जुड़े विवादित मामले पर सुनवाई पूरी हो गई है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं समेत सभी पक्षों की लंबी बहस और दलीलों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले पर क्या फैसला सुनाती है.

याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलीलें:

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं (सब-इंस्पेक्टरों) की ओर से वरीय अधिवक्ता और एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत कुमार ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत के समक्ष मजबूती से तर्क देते हुए कहा राज्य में करीब 400 से ज्यादा सब-इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारियों को नियुक्ति के बाद से ही केवल स्पेशल ब्रांच तक सीमित कर दिया गया है. जबकि नियुक्ति के समय जारी विज्ञापन और भर्ती नियमावली में इस बात का कहीं भी उल्लेख या प्रावधान नहीं था कि उनकी सेवा केवल स्पेशल ब्रांच तक ही सीमित रखी जाएगी. एक ही कैडर में सीमित रखने से अधिकारियों के करियर की प्रगति और तबादले के अवसरों पर विपरीत असर पड़ रहा है.

सरकार का पक्ष, यह कदम निर्धारित नियमों के तहत ही उठाया गया है:

दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे वकीलों ने क्लोज कैडर के फैसले का बचाव किया. सरकार की दलील थी कि यह कदम निर्धारित नियमों के तहत ही उठाया गया है. विभाग की प्रशासनिक आवश्यकताओं और विशिष्ट कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए क्लोज कैडर से जुड़ा आदेश जारी किया गया है.

क्या है पूरा विवाद?:

स्पेशल ब्रांच में तैनात विकास कुमार सिंह, मुकेश कुमार और फिरोज अंसारी सहित 300 से अधिक सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है. इन पुलिसकर्मियों की मुख्य आपत्ति यह है कि उन्हें सामान्य पुलिसिंग या अन्य विभागों में सेवा देने का मौका न देकर केवल स्पेशल ब्रांच के कैडर में ही “क्लोज” (सीमित) कर दिया गया है, जो उनकी प्रारंभिक नियुक्ति की शर्तों के विपरीत है.

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