झारखंड: 116 करोड़ के जेटीडीसीएल-ऊर्जा घोटाले में बड़ी कार्रवाई

Ranchi: झारखंड में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित जेटीडीसीएल और ऊर्जा विभाग घोटाले में सीआईडी ने अपनी जांच तेज कर दी है. जांच...

Ranchi: झारखंड में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित जेटीडीसीएल और ऊर्जा विभाग घोटाले में सीआईडी ने अपनी जांच तेज कर दी है. जांच एजेंसी ने इस वित्तीय धोखाधड़ी के मुख्य साजिशकर्ता अराध्य सेनगुप्ता उर्फ अर्नव गांगुली समेत तीन आरोपियों के खिलाफ सीआईडी की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला 116 करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी राशि की हेराफेरी से जुड़ा है. ताजा चार्जशीट में सीआईडी ने नौ करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी में इन तीनों आरोपियों की सीधी संलिप्तता के प्रमाण पेश किए हैं. सीआईडी द्वारा दाखिल चार्जशीट (कांड संख्या 42/2024) में अराध्य सेनगुप्ता उर्फ अर्नव गांगुली बीते 12 जनवरी से ही न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है. उसे इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य सूत्रधार माना जा रहा है. इसके अलावा समीर कुमार उर्फ रूद्र वर्तमान में जमानत पर बाहर है और अरुण कुमार पांडेय भी फिलहाल जमानत पर है.

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साजिश का तरीका: कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम?

सीआईडी की जांच में इस गिरोह के काम करने के बेहद चौंकाने वाले और शातिर तरीके सामने आए हैं. आरोपियों ने सरकारी तंत्र की खामियों का फायदा उठाकर एक सुनियोजित साजिश रची थी. गिरोह ने सरकारी संस्थानों के फर्जी लेटरहेड तैयार किए और उच्च अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर व नकली आदेश पत्रों का सहारा लिया. आरोपियों ने विभिन्न बैंकों में ऐसे खाते खुलवाए जो नाम में बिल्कुल सरकारी खातों जैसे दिखते थे, ताकि किसी को शक न हो. सरकारी संस्थानों (जेटीडीसीएल और ऊर्जा निगम) से फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए विभिन्न बैंकों से कोटेशन मंगवाए गए. आरोपियों ने इन कोटेशन में हेरफेर कर कागजों पर ऊंची ब्याज दरें दिखाईं, जिससे उनके द्वारा चयनित बैंकों को प्राथमिकता मिली. एक बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद, असली सरकारी खातों से करोड़ों की राशि को योजनाबद्ध तरीके से उन फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लिया गया, जिन्हें आरोपियों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था.

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निशाने पर थे ये बड़े सरकारी संस्थान

आरोपियों ने मुख्य रूप से झारखंड के इन तीन प्रमुख संस्थानों के फंड में सेंधमारी की जिनमें झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड, झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड और झारखंड स्टेट इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज मास्टर ट्रस्ट शामिल है.

अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत की जांच जारी

सीआईडी की चार्जशीट में स्पष्ट किया गया है कि यह घोटाला केवल बाहरी अपराधियों तक सीमित नहीं था. जांच के दौरान जेटीडीसीएल और संबंधित बैंकों के कई अधिकारियों, कर्मचारियों और बिचौलियों की संदिग्ध भूमिका भी उजागर हुई है.

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