BREAKING : झारखंड सरकार का बड़ा फैसला : सात साल पहले जिस अधिकारी को किया था सेवा से बर्खास्त, वह फिर से हुआ बहाल, पढ़े पूरी रिपोर्ट

Ranchi : झारखंड सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सेवा से बर्खास्त अधिकारी को दोबारा बहाल किया है. इस संबंध में...

AI तस्वीर

Ranchi : झारखंड सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए सेवा से बर्खास्त अधिकारी को दोबारा बहाल किया है. इस संबंध में सरकार की तरफ अधिसूचना जारी कर दी गई है. जारी अधिसूचना के मुताबिक झारखंड सरकार के पथ निर्माण विभाग के बर्खास्त किए गए सहायक अभियंता सुशील कुमार को वापस सेवा में बहाल कर दिया है. झारखंड हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश और राज्य मंत्रिमंडल (मंत्रिपरिषद) की मंजूरी के बाद विभाग ने इस संबंध में विस्तृत अधिसूचना जारी कर दी है. कोर्ट ने उनके खिलाफ की गई विभागीय कार्रवाई और बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया था. जिसके आलोक में सरकार को यह कदम उठाना पड़ा है.

क्या है पूरा मामला और क्या थे आरोप?

मामला सुशील कुमार के ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल, लोहरदगा में सहायक अभियंता के पद पर पदस्थापन काल (वर्ष 2006-07) से जुड़ा है. उन पर आरोप था कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ‘फतेहपुर से टियमु’ सड़क निर्माण कार्य को उन्होंने निर्धारित समयावधि में पूरा नहीं कराया. इसके अलावा, उन पर संवेदक (ठेकेदार) प्रदीप कुमार उपाध्याय के साथ मिलकर 1.26 करोड़ की राशि के गबन और वास्तविक कार्य से अधिक का फर्जी भुगतान दिखाने का गंभीर आरोप लगा था.
इसके बाद, रांची नगर निगम में पदस्थापन के दौरान भी वर्ष 2013 में एक भवन प्लान (G+4) की स्वीकृति के बदले रिश्वत मांगने और आवेदन निरस्त करने की कोशिश का आरोप एक शिकायतकर्ता कमल कुमार अग्रवाल द्वारा किया गया था. इन मामलों को लेकर उनके खिलाफ निगरानी थाना कांड संख्या 50/2010 भी दर्ज की गई थी. जिसमें वे 16 जून 2015 से 20 नवंबर 2015 तक न्यायिक हिरासत (जेल) में रहे थे.

सेवा से किया गया था बर्खास्त

गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमाणित मानते हुए झारखंड सरकारी सेवक नियमावली-2016 के तहत सरकार ने अधिसूचना संख्या-1616 (S) दिनांक 08 मार्च 2019 द्वारा सुशील कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया था. वह 31 मई 2019 को अपनी सेवानिवृत्ति की आयु पूरी करने वाले थे, लेकिन उससे ठीक पहले उन्हें यह कठोर दंड दिया गया था.

हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को किया निरस्त

बर्खास्ती के इस आदेश के खिलाफ सुशील कुमार ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका (W.P.(S) No.-1608/2022) दायर की थी. मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 10 जुलाई 2024 को अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि इस मामले में कोई मौखिक साक्ष्य नहीं दिया गया और न ही मुख्य दस्तावेजों के लेखकों की जांच की गई. कोर्ट ने प्राथमिक जांच की रिपोर्ट के आधार पर दी गई इतनी बड़ी सजा को त्रुटिपूर्ण माना और 2019 के बर्खास्तगी आदेश को पूरी तरह से निरस्त कर दिया. चूंकि अभियंता अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र के बिल्कुल अंत में बर्खास्त किए गए थे, इसलिए न्यायालय ने उन्हें बैक-डेट से बहाल मानते हुए सभी पेंशनभोगी लाभ और परिणामी लाभ देने का आदेश दिया.

 

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