Ranchi: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों की मान्यता से जुड़ी भूमि मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. नए नियमों के तहत अब स्कूल के क्षेत्र और स्थान के आधार पर भूमि की न्यूनतम आवश्यकता निर्धारित की गई है. बोर्ड ने छात्रों के सर्वांगीण विकास और खेल गतिविधियों को प्राथमिकता देते हुए सभी स्कूलों के लिए कम से कम 2000 वर्ग मीटर का खेल मैदान अनिवार्य कर दिया है.
जिन स्कूलों के पास 6000 वर्ग मीटर से कम भूमि है, वे अपने परिसर या पास के किसी स्कूल, कॉलेज, स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स अथवा खेल प्राधिकरण के साथ खेल मैदान के लिए समझौता कर सकते हैं. यह समझौता न्यूनतम 15 वर्षों के लिए होना चाहिए और खेल मैदान स्कूल से 200 मीटर की दूरी पर होना चाहिए. सुरक्षा के मद्देनजर छात्रों को मैदान तक पहुंचने के लिए राष्ट्रीय, राज्य या जिला राजमार्ग पार नहीं करना पड़ेगा.

भूमि मानकों को तीन श्रेणियों में बांटा गया
भूमि की न्यूनतम आवश्यकता के लिए तीन श्रेणियां बनाई गई हैं. श्रेणी ‘अ’ (देश में कहीं भी) के तहत सीनियर सेकेंडरी स्कूल के लिए न्यूनतम 6000 वर्ग मीटर भूमि जरूरी होगी. श्रेणी ‘ब’ (बी श्रेणी के शहर, राज्य की राजधानियां एवं पहाड़ी क्षेत्र) में सेकेंडरी स्तर के लिए 2400 वर्ग मीटर एवं सीनियर सेकेंडरी के लिए 3200 वर्ग मीटर भूमि जरूरी होगी. श्रेणी ‘स’ के तहत ऐसे शहर आएंगे जो DPA समूह में शामिल हैं.
कैराली पब्लिक स्कूल के राजेश पिल्लई बताते हैं कि CBSE की गाइडलाइन के अनुसार स्कूलों को जमीन संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा. जिन स्कूलों के पास मानक के अनुरूप भूमि नहीं है, उन्हें इसे विकसित करने के लिए समय दिया जाएगा. यदि समय पर नियमों का अनुपालन नहीं होता है तो बोर्ड कार्रवाई करेगा.
उन्होंने कहा कि राजधानी में कई ऐसे स्कूल हैं जो CBSE से संबद्धता प्राप्त हैं, लेकिन वहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. इसी को देखते हुए बोर्ड पहले गाइडलाइन जारी कर रहा है और स्कूलों को समय दे रहा है. यदि सभी मानक पूरे नहीं होते हैं तो उनकी संबद्धता रद्द कर दी जाएगी.
ALSO READ: 1 जून से कोडरमा होकर राजधानी नीलांचल एक्सप्रेस रहेगी लेट, यूपी के इन 5 स्टेशनों पर नहीं रुकेगी ट्रेन
