Chaibasa : जिला का मंगल बाजार अपनी बदहाली पर रो रहा है. विडंबना ये है कि जिस व्यक्ति के कार्यकाल में बाजार कचरे का अंबार बन गया, नियमों को ताक पर रखकर उसी को दो वर्षों की बंदोबस्ती सौंप दी गई. बंदोबस्ती देने के लिये नगर परिषद के राजस्व हितों को भी कुर्बान कर दिया गया.

सफाई के नाम पर सिर्फ तारीख़… तारीख़… तारीख़… का खेल
समझौता पत्र में निर्धारित शर्तें कागज़ों तक सीमित हैं और नव निर्वाचित बोर्ड के निर्देशों की भी खुलेआम अवहेलना हो रही है. लगता है कि जिम्मेदारों ने बाजार को बाजार नहीं, बल्कि कूड़ाघर में बदलने का ठेका ले रखा है. बाजार की सफाई की बात करने पर सिर्फ तारीख ही दिया जाता है. लेकिन सफाई कभी नहीं की जाती.
जब जवाबदेही रिश्तों की गुलाम हो जाएं और व्यवस्था तारीख़ों के सहारे चलने लगे. तब कचरे के ढेर सिर्फ बाजार में नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच और नीयत पर भी दिखाई देने लगते हैं.
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