Chaibasa: जिले के अत्यंत सुदूरवर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्र टोंटो पंचायत में सरकारी उदासीनता और संवेदकों (ठेकेदारों) की भारी लापरवाही के कारण विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए हैं. पंचायत भवन से टोपाबेड़ा होते हुए ग्राम कोड़ेजोड़ा तक डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) मद से निर्माणाधीन पीसीसी (PCC) सड़क और देव नदी पर बन रहा पुल वर्षों बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हो रही है.
DMFT मद से बन रही सड़क का निर्माण ठप
ग्राम टोंटो पंचायत भवन से टोपाबेड़ा होते हुए कोड़ेजोड़ा तक जाने वाली पीसीसी सड़क का निर्माण कार्य मई 2026 से ठप पड़ा है. जब ग्रामीणों ने निर्माण कार्य बंद होने के संबंध में संवेदक से जवाब मांगा, तो उसने वनों की स्वीकृति (Forest Clearance) न मिलने को इसकी वजह बताया. ग्रामीणों का तीखा सवाल है कि यदि कार्य के लिए एनओसी (NOC) नहीं मिली थी, तो विभागीय स्तर पर इसकी पूर्व तैयारी क्यों नहीं की गई? आधी-अधूरी सड़क छोड़ दिए जाने से क्षेत्र के लोगों का आवागमन अत्यंत दुरुह हो गया है.

देव नदी पर पुल का निर्माण 3 वर्षों से अधूरा, बरसात में ग्रामीण परेशान
इसी क्षेत्र में टोंटो और टोपाबेड़ा को जोड़ने वाली देव नदी पर ‘मुख्यमंत्री ग्राम सेतु योजना’ के तहत स्वीकृत पुल का निर्माण कार्य पिछले तीन वर्षों से अधर में अटका हुआ है:पेटी कांट्रैक्टिंग का खेल: ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि पुल निर्माण का ठेका ‘वेदी कॉन्ट्रैक्शन’ को मिला था, लेकिन संवेदक ने नियमों को ताक पर रखकर इसे पेटी (Sub-contract) पर किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया.जन-जीवन पर असर: जवाबदेही के अभाव में कार्य अत्यंत धीमी गति से चला और अंततः पूरी तरह बंद हो गया। वर्तमान में बारिश के मौसम में नदी उफान पर होने के कारण ग्रामीणों का संपर्क मुख्य मार्ग से पूरी तरह कट जाता है. इससे स्वास्थ्य आपातकाल (Medical Emergencies) और दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

संवेदकों को ब्लैकलिस्ट करने की उठी पुरजोर मांग
स्थानीय ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित कार्यपालक अभियंता से दोनों संवेदकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है.ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा, दोनों ही संवेदक जनता के पैसों और सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिस तरह से सड़क और पुल का काम वर्षों से लटका कर रखा गया है, विभाग को तुरंत संज्ञान लेते हुए दोनों कंपनियों को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में दर्ज) करना चाहिए और नए सिरे से टेंडर निकालकर काम जल्द पूरा कराना चाहिए.
विभाग से त्वरित हस्तक्षेप की अपील
जनहित से जुड़ी इन दो प्रमुख योजनाओं के लंबे समय से बंद रहने के कारण क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है. ग्रामीणों ने पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त (DC) और विभागीय अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय स्थल जांच कराई जाए, फॉरेस्ट क्लीयरेंस संबंधी अड़चनों को दूर किया जाए तथा जिम्मेदार संवेदकों पर कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य अविलंब बहाल कराया जाए.

