News Desk : देश में एलपीजी के इस्तेमाल को लेकर एक साफ अंतर सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक शहरी इलाकों में प्रति परिवार गैस की खपत ज्यादा है. दिल्ली जैसे शहरों में एक परिवार औसतन हर महीने करीब 11.4 किलो एलपीजी का इस्तेमाल करता है. वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे ग्रामीण इलाकों में यह खपत 6.7 से 7.7 किलो के बीच ही रहती है. यानी गांवों में एक सिलेंडर काफी लंबे समय तक चलता है.
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साफ ईंधन की पहुंच में बड़ा अंतर
नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के आंकड़े बताते हैं कि शहरों में करीब 92.9 प्रतिशत परिवार एलपीजी या पीएनजी जैसे साफ ईंधन का उपयोग कर रहे हैं. इसके उलट ग्रामीण भारत में सिर्फ 49.3 प्रतिशत परिवार ही इन ईंधनों तक पहुंच बना पाए हैं. बाकी लोग अब भी लकड़ी, कोयला और उपले जैसे पारंपरिक साधनों पर निर्भर हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए चुनौती बने हुए हैं.
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कनेक्शन ज्यादा, लेकिन उपयोग कम
दिलचस्प बात यह है कि एलपीजी कनेक्शन की संख्या में ग्रामीण राज्यों की हिस्सेदारी ज्यादा है. उत्तर प्रदेश में करीब 4.87 करोड़ उपभोक्ता हैं, जो देश का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा है. इसके अलावा महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार में भी बड़ी संख्या में कनेक्शन मौजूद हैं. इसके बावजूद गांवों में गैस का नियमित उपयोग कम है, क्योंकि लोग अब भी पारंपरिक ईंधन का सहारा लेते हैं.
उज्ज्वला योजना से बढ़ी पहुंच, लेकिन आदत नहीं बदली
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए गांवों तक एलपीजी पहुंचाने में बड़ी सफलता मिली है. करीब 80 प्रतिशत लाभार्थी ग्रामीण इलाकों से हैं और देश में कुल कनेक्शन 33 करोड़ के पार पहुंच चुके हैं. इसके बावजूद कई परिवार गैस के साथ-साथ लकड़ी या बायोमास का भी इस्तेमाल करते हैं. वहीं शहरों में पारंपरिक ईंधन उपलब्ध नहीं होने के कारण लोग पूरी तरह एलपीजी और पीएनजी पर ही निर्भर हैं.
