Deoghar: मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से न्याय की गुहार लगाने वाली महिला खिलाड़ियों ने अब देवघर जिला प्रशासन पर ही गंभीर आरोप लगाए हैं. खिलाड़ियों का कहना है कि शिकायत के बाद उन्हें न्याय देने के बजाय जांच के नाम पर दबाव बनाने और बयान बदलवाने की कोशिश की गई. आरोप है कि उपविकास आयुक्त (DDC) कार्यालय में हुई जांच के दौरान खिलाड़ियों और उनके प्रशिक्षक को डराया-धमकाया गया. खिलाड़ियों को कागज देकर कहा गया कि आवेदन में लगाए गए गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी और अन्य आरोपों को हटाकर नया बयान लिखें और अगले दिन जमा करें. खिलाड़ियों का आरोप है कि जांच के दौरान उपविकास आयुक्त ने खुद खेल मामलों की जानकारी नहीं होने की बात कही और जिला खेल पदाधिकारी (DSO) को बुला लिया. इसके बाद पूरी सुनवाई में DSO का पक्ष ही प्रमुखता से सुना गया, जबकि खिलाड़ियों की शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया. इतना ही नहीं, छात्रवृत्ति नहीं मिलने का ठीकरा भी प्रशिक्षक पर फोड़ दिया गया.
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उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए, जांच के दौरान वही पक्ष प्रभावी नजर आया. इससे पूरी जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं. महिला खिलाड़ियों का कहना है कि न्याय की उम्मीद में की गई शिकायत के बाद प्रशासन का रवैया उनकी मुश्किलें और बढ़ाने वाला साबित हुआ. अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और उच्चस्तरीय हस्तक्षेप की मांग की जा रही है.
