Chaibasa: पश्चिमी सिंहभूम के मझगांव प्रखंड स्थित पांडुकी गांव में सोमवार को हो समाज की आस्था के प्रमुख केंद्र देशाउली में पारंपरिक रीति-रिवाज एवं धार्मिक विधि-विधान के अनुसार जाते-परचि (शुद्धिकरण) अनुष्ठान संपन्न हुआ. अनुष्ठान में गांव के मानकी, मुंडा, दिउरी, बुजुर्ग, युवा और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए.
देशाउली की सुरक्षा का लिया संकल्प
शुद्धिकरण अनुष्ठान के बाद ग्रामीणों ने देशाउली की पवित्रता, सुरक्षा और संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया. आदिवासी हो समाज युवा महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष इपिल सामड ने कहा कि देशाउली समाज की आस्था, संस्कृति और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है, जिसकी रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है.
धार्मिक भावनाएं आहत होने पर जताई चिंता
बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि हाल के दिनों में बाहरी लोगों द्वारा देशाउली परिसर में अभद्र व्यवहार तथा शराब, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन की घटनाओं से पूजा स्थल की पवित्रता प्रभावित हुई है. इसी कारण सर्वसम्मति से शुद्धिकरण अनुष्ठान कराया गया.
सांस्कृतिक विरासत बचाने का आह्वान
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला अध्यक्ष शेरसिंह बिरुवा ने धार्मिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराए जाने पर समाज सामूहिक निर्णय लेगा. बैठक के अंत में ग्रामीणों ने देशाउली परिसर की नियमित साफ-सफाई, संरक्षण और पारंपरिक पूजा-अर्चना जारी रखने का संकल्प लिया.
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