Exclusive- अफीम के नेक्सस पर होगा प्रहार: MP के हाई-टेक सर्विलांस मॉडल का अध्ययन करेगी झारखंड पुलिस, CM के निर्देश पर तैयारी तेज

Ranchi: झारखंड के सुदूर और उग्रवाद प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर होने वाली अफीम की अवैध खेती पर पूरी तरह नकेल...

Ranchi: झारखंड के सुदूर और उग्रवाद प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर होने वाली अफीम की अवैध खेती पर पूरी तरह नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने मध्य प्रदेश के सुरक्षा मॉडल का अध्ययन करने का निर्देश पुलिस मुख्यालय को दिया है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में यह निर्देश दिया गया है कि झारखंड पुलिस की एक विशेष टीम मध्य प्रदेश में अफीम की खेती रोकने के लिए अपनाई जा रही वैधानिक प्रक्रियाओं और आधुनिक तकनीकों का जमीनी स्तर पर अवलोकन करे.

हर संभव और कड़े कदम उठाए जाएं

मुख्यमंत्री ने वरीय पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य के जंगलों और पहाड़ों में अफीम की खेती को रोकने के लिए हर संभव और कड़े कदम उठाए जाएं. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मध्य प्रदेश पुलिस जिस तरह वहां अवैध खेती पर काबू पाने में सफल रही है, उस मॉडल का गहन अध्ययन कर झारखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार उसे यहां लागू किया जाए. झारखंड के खूंटी, चाईबासा, लातेहार, चतरा और पलामू जैसे जिलों के घने जंगलों में अफीम की अवैध खेती की जाती है.

Also Read: घर से उठाकर युवक को प्रभात तारा मैदान ले गए हमलावर, लोहे की रॉड से बेरहमी से पीटा, पुलिस को देख भागे

क्या है मध्य प्रदेश मॉडल, जानिए

विलेज लेवल एकाउंटेबिलिटी:

मध्य प्रदेश में यदि किसी गांव की सीमा में अवैध अफीम की खेती पाई जाती है, तो वहां के स्थानीय सरपंच, पटवारी या चौकीदार को एनडीपीएस एक्ट की धारा 46/47 के तहत सीधे जवाबदेह ठहराया जाता है. सूचना नहीं देने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है.

सैटेलाइट मैपिंग और ड्रोन बेस्ड क्रॉप डिटेक्शन:

मध्य प्रदेश पुलिस, इसरो और केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो के सहयोग से खेतों की जियो-टैगिंग और सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए संदिग्ध फसलों की पहचान करती है.

कानूनी प्रक्रिया और फसल विनष्टीकरण की ऑन-द-स्पॉट व्यवस्था:

अवैध अफीम की फसल मिलने पर एनडीपीएस एक्ट के कड़े नियमों के तहत राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में मौके पर ही वीडियोग्राफी के साथ फसल को ट्रैक्टर चलाकर या रसायनों के माध्यम से नष्ट किया जाता है और उसके फॉरेंसिक सैंपल भी एकत्र किए जाते हैं.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *