Ajay Dayal

Ranchi : झारखंड में मोबाइल और बिजली के टावर अब सिर्फ नेटवर्क या रोशनी देने का जरिया नहीं रहे, बल्कि ये सिरफिरे आशिकों और मायूस प्रेमियों के लिए एक नया और खतरनाक सुसाइडल पॉइंट बनते जा रहे हैं. प्यार की जिद हो या टूटे दिल की मायूसी, सूबे के युवा आजकल अपनी मांगों को मनवाने या जिंदगी खत्म करने के लिए सीधे सैकड़ों फीट ऊंचे टावरों का रुख कर रहे हैं. इस जानलेवा ट्रेंड ने पुलिस, प्रशासन और समाज के होश उड़ा दिए हैं. ताजा और सबसे खौफनाक मामला बेड़ो से सामने आया है. जहां प्रेम प्रसंग में एक युवक ने बिजली के टावर पर ही फांसी लगा ली.
बेड़ो में इश्क का दर्दनाक अंत, टावर पर लटकी लाश
ताजा घटना बेड़ो इलाके की है, जहां बिरसा उरांव नामक युवक का प्रेम प्रसंग चल रहा था. प्यार में नाकाम होने या किसी अनबन के बाद मायूसी इस कदर हावी हुई कि बिरसा ने मौत के लिए एक बेहद खौफनाक रास्ता चुना. वह गांव के पास स्थित एक ऊंचे बिजली के टावर पर चढ़ गया और वहीं फंदा लगाकर अपनी जान दे दी. जब सुबह ग्रामीणों ने टावर पर उसकी लाश लटकती देखी, तो पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद शव को नीचे उतारा.
गोमो से गिरिडीह तक, टावर पर शोले स्टाइल ड्रामा
झारखंड में टावर पर चढ़ने की ये सनक एक खतरनाक पैटर्न बनती जा रही है. कुछ ही दिन पहले गोमो में एक युवती अपने प्रेमी को (जो किसी मामले में फंसा था) छुड़ाने की जिद पर अड़ गई और सीधे मोबाइल टावर पर जा चढ़ी. घंटों चले इस शोले स्टाइल ड्रामे और पुलिस व प्रशासन की कड़ी मशक्कत के बाद उसे सही सलामत नीचे उतारा जा गया.
गिरिडीह में भी दोहराई कहानी
गोमो की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि गिरिडीह में भी ठीक इसी तरह की घटना सामने आई. जहां एक शख्स अपनी मांगों को लेकर टावर पर चढ़ गया और प्रशासन के हाथ पांव फूल गए.
क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक
मनोवैज्ञानिक डॉ राहुल शरण के अनुसार यह प्रवृत्ति अटेंशन सीकिंग बिहेवियर (ध्यान खींचने की चाह) और अचानक उपजे भारी आवेग का नतीजा है. अगर वक्त रहते समाज और परिवार ने युवाओं की काउंसलिंग नहीं की, तो ये टावर ऐसे ही जिंदगियां निगलते रहेंगे.
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