Ranchi: देवघर जिला के जसीडीह थाना क्षेत्र से पुलिसिया मिलीभगत, भ्रष्टाचार और पीड़ित परिवार को ही प्रताड़ित करने का एक गंभीर मामला सामने आया है. इस पूरे मामले में झारखंड पुलिस मुख्यालय ने संज्ञान लेते हुए देवघर एसपी को जांच का आदेश दिया हैं. उल्लेखनीय हैं, कि जसीडीह थाना क्षेत्र के कुंजी सर गांव के निवासी अक्षय कुमार पांडेय ने जसीडीह थाना प्रभारी दीपक कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए डीजीपी से शिकायत किया था. इस शिकायत के बाद झारखंड पुलिस मुख्यालय ने मामले को संज्ञान में लेते हुए देवघर एसपी को त्वरित जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश जारी किया है.

क्या है पूरा मामला?
पीड़ित अक्षय कुमार पांडेय के अनुसार, यह विवाद 18 अप्रैल की शाम लगभग सात बजे शुरू हुआ, जब मुन्ना पंडित, रामकृष्ण पंडित और गोविंद पंडित सहित करीब 10 नामजद अभियुक्तों ने उनके घर में घुसकर जानलेवा हमला किया अपराधियों द्वारा किए गए बम विस्फोट के कारण पीड़ित का पैर बुरी तरह झुलस गया. उनके सिरपर गहरा जख्म हुआ. घटना की सूचना डायल 100 पर दिए जाने के बाद एएसआई कौशलेन्द्र कुमार मौके पर पहुंचे. उन्होंने घटनास्थल से अपराधियों के खिलाफ कई महत्वपूर्ण भौतिक और वैज्ञानिक साक्ष्य (जैसे: सुतरी बम के अवशेष, पेट्रोल बम के अवशेष, खून से सना धारदार छौरा, आरोपी का गमछा) विधिवत जब्त किए.
थाना प्रभारी पर एक लाख रिश्वत लेने और साक्ष्य गायब करने का आरोप:
शिकायत पत्र के अनुसार, जसीडीह थाना प्रभारी दीपक कुमार ने कथित तौर पर अपराधियों से एक लाख रुपया की नकद रिश्वत ली. रिश्वत लेकर उन्होंने न सिर्फ मामले के महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्यों को गायब कर दिया, बल्कि अपराधियों को पूर्ण प्रशासनिक संरक्षण भी प्रदान किया. संरक्षण मिलने के बाद अपराधियों के हौसले इतने बढ़ गए कि उन्होंने 16 मई को पीड़ित पर दोबारा जानलेवा हमला कर दिया, जिससे पीड़ित के दाहिने हाथ की कलाई की हड्डी टूट गई.
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विधायक का भांजा हूं, एनकाउंटर कर दूंगा, थाना प्रभारी पर धमकी के आरोप:
अक्षय कुमार पांडेय का आरोप है कि जब उन्होंने पुलिस मुख्यालय को इस मामले से अवगत कराया, तो थाना प्रभारी दीपक कुमार बौखला गए. पीड़ित का दावा है कि थाना प्रभारी ने उन्हें 13 घंटे तक थाने में अवैध बंधक बनाकर रखा और अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए सीधे तौर पर धमकी दी.ज्यादा होशियार मत बनो, गोली मार देंगे और एनकाउंटर कर देंगे. मैं विधायक का भांजा हूं, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता. चुपचाप सुलह-समझौता कर लो, नहीं तो झूठे मुकदमों में फंसाकर पूरा जीवन जेल में सड़ा देंगे. यही नहीं, पीड़ित ने आरोप लगाया है कि जब उनकी वृद्ध मां (सीनियर सिटीजन) और पत्नी थाने में गुहार लगाने गईं, तो थाना प्रभारी ने उनके साथ भी अत्यंत अभद्र व्यवहार किया, भद्दी-भद्दी गालियां दीं और उन्हें थाने से अपमानित करके खदेड़ दिया.
