झारखंड के ‘सोनम वांगचुक’ बने देवेंद्र नाथ महतो, JPSC-JSSC की धांधली के खिलाफ आमरण अनशन पर डटे छात्र नेता

Prerna Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों एक सुलगते हुए छात्र आंदोलन का केंद्र बनी हुई है. मोरहाबादी स्थित ऐतिहासिक जयपाल...

Devendra Nath Mahato
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो

Prerna

Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों एक सुलगते हुए छात्र आंदोलन का केंद्र बनी हुई है. मोरहाबादी स्थित ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा आर्चरी स्टेडियम (मड़वा) अब दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर युवा हुंकार का गवाह बन रहा है. इस आंदोलन के केंद्र में है एक ऐसा चेहरा, जिसने अपनी वैचारिक स्पष्टता, अटूट दृढ़ संकल्प और अहिंसक सत्याग्रह के बल पर पूरे राज्य के युवाओं को झकझोर कर रख दिया है. लोग इन्हें झारखंड का सोनम वांगचुक कहकर पुकार रहे हैं. यह शख्स कोई और नहीं, बल्कि जुझारू छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो हैं, जो इन दिनों JPSC और JSSC जैसी प्रमुख चयन आयोगों में व्याप्त भ्रष्टाचार और धांधली के खिलाफ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

संघर्ष की भट्टी में तपकर कुंदन बने देवेंद्र नाथ महतो

रांची जिले के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र राहे प्रखंड के कापीडीह गांव की माटी से निकलकर अकादमिक उत्कृष्टता का शिखर छूने वाले देवेंद्र नाथ महतो का जीवन संघर्ष और प्रेरणा की एक मुकम्मल दास्तान है. अभावों और विषम परिस्थितियों को पछाड़ते हुए भी उन्होंने अपनी शैक्षणिक यात्रा में कई मुकाम हासिल किए. देवेंद्र नाथ ने वर्ष 2006 में बुंडू (JAC बोर्ड) से प्रथम श्रेणी में मैट्रिक परीक्षा पास की. इसके बाद 2008 में विज्ञान संकाय से इंटरमीडिएट और रांची के डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से संस्कृत में प्रथम श्रेणी में स्नातक की डिग्री हासिल की. सत्र 2015-2017 में हजारीबाग से B.Ed की डिग्री प्रथम श्रेणी में प्राप्त की. इसके बाद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से ही सत्र 2018-2020 में संस्कृत और सत्र 2020-2022 में कुरमाली (जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय) में दो अलग-अलग विषयों में प्रथम श्रेणी से स्नातकोत्तर (PG) की उपाधि प्राप्त की.

व्यक्तिगत दुखों को दरकिनार कर छात्रों के हक में बने ढाल

देवेंद्र नाथ महतो का संघर्ष केवल किताबी डिग्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जमीन पर उतरा हुआ एक ऐसा तप है, जिसमें उन्होंने व्यक्तिगत त्रासदियों का भी सामना किया है. छठी JPSC परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जब छात्र आंदोलन अपने चरम पर था, तब उन्होंने अपनी माता को खो दिया. एक युवा के लिए यह सबसे बड़ा आघात था, लेकिन इसके बावजूद वे झारखंड के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए. वर्ष 2015 से ही वे छात्रहित के सुलगते मुद्दों जैसे  छात्रवृत्ति (स्कॉलरशिप) वितरण में अनियमितता, पेपर लीक माफियाओं का साम्राज्य, त्रुटिपूर्ण नियोजन नीतियां और JPSC-JSSC की परीक्षाओं में धांधली के खिलाफ लगातार मुखर रहे हैं.

क्यों फूंकना पड़ा आंदोलन का बिगुल

5 जुलाई को JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम आते ही राज्य के युवाओं का असंतोष ज्वालामुखी बनकर फट पड़ा. परिणामों में सामने आई भारी गड़बड़ियों ने छात्रों के सब्र का बांध तोड़ दिया. इन विसंगतियों के सार्वजनिक होने के बाद देवेंद्र नाथ महतो के पास आमरण अनशन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा. उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक दोनों प्रमुख भर्ती एजेंसियों में सिस्टम की पूरी सफाई नहीं हो जाती, यह आंदोलन और भूख हड़ताल थमने वाली नहीं है. इस बीच, इस जनांदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी समर्थन मिलना शुरू हो गया है. कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देवेंद्र नाथ महतो से विस्तृत चर्चा की है और इस छात्र आंदोलन को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है.

यह भी पढ़ें: रांची: नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हुए अपर बाजार के व्यापारी, 12 बजे तक बंद रहीं दुकानें

 

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *