Dhanbad: झरिया में गहराते पानी और बिजली संकट को लेकर स्थानीय व्यापारिक संगठनों द्वारा किए गए तीखे विरोध प्रदर्शन और चेतावनियों के बावजूद अब तक ‘झरिया बंद’ का कोई आह्वान नहीं किया गया है. आंदोलन की गति धीमी पड़ने से अब आम जनता के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर व्यापारियों द्वारा प्रशासन को दी गई वह बड़ी चेतावनी कब अमल में लाई जाएगी?

दशकों पुरानी समस्या से त्रस्त है जनता
गौरतलब है कि पिछले दिनों झरिया के विभिन्न व्यापारी संगठनों ने डीवीसी (DVC), जेबीवीएनएल (JBVNL) और माडा (MADA) की कथित निष्क्रियता और तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर उतरकर थाली पीटकर प्रदर्शन किया था. झरिया की जनता दशकों से बुनियादी सुविधाओं (बिजली-पानी) के इस संकट को झेलने को मजबूर है.
व्यापारियों का पक्ष
वस्त्र व्यवसाय संघ के अध्यक्ष उपेन्द्र गुप्ता समेत कई प्रमुख व्यापारिक नेताओं ने साफ कहा था कि बिजली संकट के कारण न केवल व्यापार ठप हो रहा है, बल्कि छात्रों की पढ़ाई और घरेलू जीवन भी बुरी तरह प्रभावित है. वहीं पानी की अनियमित आपूर्ति ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है.
जनप्रतिनिधियों और विभागों पर फूटा गुस्सा
प्रदर्शन के दौरान पूर्व पार्षद अनूप साव ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को आड़े हाथों लिया था. उन्होंने कहा कि दशकों बीत जाने के बाद भी आज तक झरिया की पानी और बिजली व्यवस्था में कोई अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है.
इसी दौरान व्यापारियों ने एक सुर में चेतावनी दी
”यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो ‘झरिया बंद’ कर जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों के खिलाफ व्यापक जनआक्रोश व्यक्त किया जाएगा.”
केवल दबाव की रणनीति या होगा बड़ा आंदोलन?
थाली पीटकर किए गए इस अनोखे विरोध प्रदर्शन के बाद भी धरातल पर पानी और बिजली की समस्या जस की तस बनी हुई है. ऐसे में अब स्थानीय नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब व्यापारिक संगठनों ने ‘झरिया बंद’ का अल्टीमेटम दिया था, तो उस दिशा में अब तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया?
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